आम दिनों में श्रम कानूनों की दुहाई देते हुए बाल मजदूरी को रोकने का ढिंढोरा पीटने वाला जिला प्रशासन धर्मनगरी में चल रहे कार्तिक पूर्णिमा मेले में स्वास्थ्य विभाग से कराए जा रहे सफाई कार्य में जुटे बाल मजदूरों पर आंखें मूंदे बैठा है।
मेला क्षेत्र में जगह-जगह नन्हें-मुन्ने हाथ झाड़ू लिए सफाई कर रहे हैं लेकिन मेला क्षेत्र में कैंप कर व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए भ्रमण कर रहे अफसरों की नजर भी इन बाल मजदूरों पर पड़ती नहीं दिख रही।
चौदहकोसी परिक्रमा से कार्तिक पूर्णिमा व परिक्रमा मेला आरंभ हो गया है। मेले में लाखों की संख्या में जुटने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए जिला के तमाम विभागों से विभिन्न व्यवस्थाएं की जा रही है।
मेला क्षेत्र में नगर पालिका के साथ ही अधिकांश स्थलों की सफाई का कार्य स्वास्थ्य विभाग के जिम्मे रहता है। प्रत्येक वर्षों की भांति इस वर्ष भी स्वास्थ्य विभाग ने बांदा जिले से लगभग साढ़े चार सौ सफाई कर्मियों को मेले में सफाई कार्य के लिए लगाने का दावा किया है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग के इस दावे की हकीकत मेला क्षेत्र में फैली गंदगी व जगह-जगह लगे कूड़े-कचरे के ढेर से ही दिख रही है। बाहर से बुलाए गए सफाई कर्मी मुख्य मार्गों के साथ ही प्रमुख मंदिरों व अन्य स्थलों पर सफाई कर रहे हैं।
इन सफाई कर्मियों में काफी संख्या में 8 से 16 वर्ष तक के बच्चे व बच्चियां भी शामिल हैं। श्रीराम अस्पताल से दंत धावन कुंड, हनुमानगढ़ी चौराहा, दीनदयाल तिराहा, बड़ा डाकखाना, नयाघाट सहित नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन आदि प्रमुख मार्गों पर इन बाल मजदूरों से मेला क्षेत्र में सफाई कार्य कराया जा रहा है।
लेकिन मेला क्षेत्र में भ्रमण करने वाले अफसरों की निगाह इन बच्चों पर नहीं पड़ रही। अलबत्ता सामान्य दिनों में बाल श्रम पर लगाम लगाने वाला श्रम विभाग व जिले के अफसर छापा कार्रवाई कर बाल मजदूरी पर लगाम लगाने का ढिंढोरा अवश्य पीटते हैं।
जबकि दिन के उजाले में मुख्य मार्गों पर नन्हें हाथों में झाड़ू व कूड़ा ढोते बाल मजदूर कदम दो कदम पर सफाई करते दिख रहे हैं।