अयोध्या। जिले में सुचित्तागंज और कुमारगंज नगर पंचायतों के सृजन से पंचायत चुनाव को लेकर काम बढ़ने की संभावना है। निकाय में शामिल गांव त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रक्रिया से बाहर होंगे। जिले में ग्राम पंचायतों की संख्या के साथ ही कुल मतदाताओं की संख्या भी घट जाएगी। इसका असर क्षेत्र पंचायत सदस्य से जिला पंचायत सदस्य के पदों की संख्या पर भी पड़ने की संभावना है।
जिले में नगर निगम के साथ ही अब दो नई नगर पंचायतों का सृजन भी हो गया है। नगर निगम बनने से जिले में 31 ग्राम पंचायतें कम हो गईं थीं। त्रिस्तरीय पंचायत की मतदाता सूची के प्रगाढ़ पुनरीक्षण में इन गांवों को शामिल नहीं किया गया है।
अब दो और नगर पंचायतों के सृजन से जिले में इनमें आंशिक या पूर्ण रूप से 11 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। हालांकि इन गांवों की मतदाता सूची बनाई जा रही है लेकिन अधिसूचना जारी होने के बाद अब ये नगर पंचायतों का हिस्सा होने के कारण त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से इन्हें बाहर किया जा सकता है।
इसके लिए त्रिस्तरीय पंचायत की मतदाता सूची से इन गांवों को हटाना पड़ सकता है। इससे जिले की कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 804 से घट जाएगी। जिले में कुल मतदाताओं की संख्या भी घट जाएगी।
पंचायत चुनाव की दृष्टि से नगर निकाय और नगर पंचायतों के सृजन के बाद न केवल प्रधान पद घटेंगे, बल्कि क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य पद के वार्ड पर भी इसका असर पड़ना स्वाभाविक है। क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों के क्षेत्र की जनसंख्या प्रभावित होने से नए सिरे से वार्डों के परिसीमन की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
ऐसे में वार्डों का नए सिरे से निर्धारण होने की संभावना है। हालांकि अधिसूचना जारी होने के बाद अब तक इस बाबत कोई निर्देश नहीं आया है लेकिन प्रशासनिक गलियारे में इसको लेकर चर्चा है।
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी सूर्यभान का कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का पुनरीक्षण चल रहा है। दो नई नगर पंचायतों के सृजन के बाद इन गांवों की मतदाता सूची को लेकर अभी कोई निर्देश नहीं मिला है।