अयोध्या। 13 किलोमीटर लंबे रामपथ के निर्माण कार्य के दौरान रोज पेयजल की लाइन टूट रही है। कार्यदायी संस्था या फिर जिला प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से आमजन को परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार एक-दूसरे पर आरोप मढ़कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। मंगलवार को छह और जगह पाइपलाइन टूट गई। दो दिन में कुल 57 जगह पेयजल लाइनें टूटने और लीकेज होने से नौ ट्यूबवेल और चार पानी की टंकियों की आपूर्ति मंगलवार सुबह 10 बजे से बंद हो गई। इससे अवधपुरी जोन के 60 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति ठप हो गई।
उमस और गर्मी के बीच पानी न मिलने से लोगों को भारी दिक्क्तों का सामना करना पड़ा। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि पाइपलाइनों की मरम्मत का काम चल रहा है, जिसके बुधवार सुबह चार बजे तक पूरा होने की संभावना है। उसके बाद ही जलापूर्ति सुचारू हो पाएगी। रामपथ का निर्माण कर रही आरएनसी कंपनी की लापरवाही जनता को भारी पड़ रही है। लोक निर्माण विभाग व नगर निगम के जलकल विभाग के अधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी भी उनकी इस मनमानी पर कोई लगाम नहीं लगा पा रहे हैं। इसका खामियाजा लोगों को बिजली और पानी के संकट के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
सहादतगंज से लेकर लता मंगेश्कर चौक तक सोमवार को 51 जगह पेयजल लाइन टूटी हुई थीं। इससे करीब एक लाख लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ा। इन लाइनों की मरम्मत हो भी नहीं पाई थी कि मंगलवार सुबह रीडगंज तिराहे से अवधपुरी तक छह जगह और पेयजल लाइन टूट गईं। इससे पूरे अवधुपरी जोन की पेयजल आपूर्ति ठप हो गई। जलकल विभाग के अधिकारियों का दावा है कि बड़ी संख्या में पेयजल लाइन टूटने के बाद भी पूरे रामपथ क्षेत्र की आपूर्ति बंद नहीं की गई है। हालांकि लाइन में लीकेज होने के कारण हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। जलकल विभाग के महाप्रबंधक महेश चंद्र आजाद ने बताया कि उन्होंने रामपथ का काम कर रही कंपनी के जीएम और लोक निर्माण विभाग फेज तीन के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि टूटी लाइन की तत्काल मरम्मत कराएं जिससे लोगों को पानी मिल सके। इसकी सूचना मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को भी दी है।
समस्या के निस्तारण की जिम्मेदारी भी कंपनी की : डीएम
जिलाधिकारी नितीश कुमार ने कहा कि रामपथ निर्माण का काम कर रही आरएनसी कंपनी की निर्माण के साथ काम के दौरान होने वाली समस्याओं के समाधान की भी पूरी जिम्मेदारी है। काम के दौरान कोई दिक्कत न आए, इसके लिए एक समन्वय समिति भी बनाई गई है। इसमें अपर जिलाधिकारी नगर, अधिशासी अभियंता जल निगम, अधिशासी अभियंता पावर कॉर्पोरेशन, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग और अधिशासी अभियंता जलकल शामिल हैं। डीएम ने कहा कि टीम का काम कार्यदायी संस्था के साथ समन्वय बनाकर काम कराना ही नहीं निगरानी करना भी है। खोदाई के समय जलकल और पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहने और लाइनों के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी जांच की जाएगी और अगर मौके पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी नहीं मिलेंगे तो र्कारवाई भी की जाएगी।
................................
पीने के लिए खरीदना पड़ रहा पानी
अश्वनीपुरम के रहने वाले अध्यापक दिव्य प्रकाश शुक्ला ने बताया कि सोमवार रात से जलापूर्ति बाधित है। पीने की समस्या उत्पन्न हो गई है, मंगलवार को तो पानी की बोतल खरीदकर काम चलाया। गिरधारी यादव और संजय सिन्हा ने बताया कि घर में लगा टुल्लू पंप खराब है। नगर निगम को फोन करने पर पाइप क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली। गर्मी में पानी न आने से बहुत दिक्कत हो रही है। यहीं के अमरजीत निषाद ने बताया कि सोमवार रात से ही जलापूर्ति ठप है। इससे दैनिक जरूरत के काम भी प्रभावित हैं। देवकाली के अनिल शर्मा व पं. दीन दयाल नगर निवासी व्यावासी अनिल साहू, विक्रमा सिंह राजपूत ने बताया कि मंगलवार सुबह से ही सप्लाई ठप है। घर के बच्चे व बूढ़े पानी के लिए तरस रहे हैं। अवधपुरी कॉलोनी निवासी व अंबेडकरनगर में स्टेट बैंक के बीमा मैनेजर अमित चतुर्वेदी व अंबेडकरनगर के ही पीएनबी में क्लर्क राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि पानी नहीं आने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हैंडपंप का विकल्प है। आपूर्ति कब बहाल होगी, इसकी सूचना भी नहीं मिल रही है।
ये मोहल्ले हैं प्रभावित
पेयजल लाइनें टूटने से अवधपुरी, कर्पूरी ठाकुर, चौधरी चरण सिंह, झलकारी बाई, सरदार पटेल नगर, पं. दीन दयाल नगर, बड़ी देवकाली, अश्वनीपुरम, कबीरनगर, आचार्य नरेंद्र देव नगर, राम मनोहर लोहिया, अमानीगंज और महात्मागांधी वार्ड।
कंपनी के कर्मचारी हमारी नहीं सुनते
निर्माण से लेकर मरम्मत तक के सारे काम की जिम्मेदारी आरएनसी कंपनी की है, लेकिन कंपनी के कर्मचारी हमारी बात ही नहीं सुनते हैं। जहां मन करता है मशीन लगाकर खोदाई शुरू कर देते हैं। मौके पर बताने के बाद भी पेयजल लाइन तोड़ देते हैं। मरम्मत के लिए कर्मचारी भी बहुत कम रखे हैं। मौके पर लोक निर्माण विभाग और कंपनी का कोई भी अधिकारी मौजूद नहीं रहता है। जलकल विभाग ने नौ कर्मचारियों और तीन सुपरवाइजरों की तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई है। जो बराबर निगरानी कर रहे हैं। कई जगह खुद ही मरम्मत का काम भी कर रहे हैं। बावजूद इसके हालात नियंत्रण में नहीं आ पा रहे हैं।
- अनु जायसवाल, अवर अभियंता, जलकल।
रोज लिखते हैं पत्र, कार्रवाई हमारे बस में नहीं
हम लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को प्रतिदिन पत्र लिखकर कितनी जगह पेयजल लाइनें टूटीं, इसकी जानकारी देने के साथ शीघ्र मरम्मत कराने का अनुरोध करते हैं। इसकी सूचना मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को भी देते हैं। कार्रवाई करना हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
- महेश चंद्र आजाद, महाप्रबंधक जलकल।