अयोध्या। रामजन्मभूमि में मंदिर के निर्माण कार्य के साथ-साथ वहां की सुरक्षा का भी खाका तैयार हो रहा है। इसी क्रम में राममंदिर समेत 70 एकड़ अधिग्रहीत परिसर की सुरक्षा के लिए डबल लेयर बैरीकेडिंग का काम भी तेजी से चल रहा है।
मंदिर निर्माण के चलते श्रद्धालुओं की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। हर रोज करीब 20 हजार श्रद्धालु रामलला के दर्शन को पहुंच रहे हैं। ऐसे में भक्तों की सुरक्षा एवं सुविधा का प्लान तैयार करने में ट्रस्ट जुटा हुआ है।
डबल लेयर बैरीकेडिंग के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा में शांति भवन से लेकर गोकुल भवन के पहले 50 मीटर लंबाई में गहरी नींव खोदी गई। अब नींव भराई का काम भी शुरू हो चुका है। इसके बाद लोहे की बैरीकेडिंग लगाई जाएगी।
पश्चिम दिशा में पीएसी कैंप के आवास के कारण उनके आवागमन के लिए सिंगल बैरीकेडिंग के साथ छोटा रास्ता भी खोला गया था। सुप्रीम फैसले के बाद रामजन्मभूमि का संपूर्ण परिसर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के हवाले हो गया है। ऐसे में पीएसी को शिफ्ट कर दिया गया है। डबल लेयर बैरीकेडिंग बनने से परिसर की सुरक्षा कड़ी हो जाएगी।
राइट्स इसी महीने सौंपेगा भीड़ नियंत्रण का प्लान
अयोध्या। रामनगरी में श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए भीड़ नियंत्रण का प्लान भी तैयार किया जा रहा है। इसका जिम्मा राइट्स को सौंपा गया है। राइट्स रामजन्मभूमि परिसर व रामनगरी के 14 कोस की परिधि में उमड़ने वाली भीड़ के नियंत्रण का प्लान तैयार कर रही है। इसी माह यह प्लान ट्रस्ट और शासन को सौंप दिया जाएगा।
राइट्स के एक अधिकारी ने बताया कि हमने एक प्रस्ताव बनाया था। जिसे बीते दिनों हुई ट्रस्ट की बैठक में पेश किया गया था। इस प्लान में कुछ संशोधन करने के लिए ट्रस्ट द्वारा सुझाव दिया गया है। अब नए सिरे से सुरक्षा का प्लान तैयार किया गया है। बताया कि एक प्लान रामजन्मभूमि में उमड़ने वाली भीड़ के नियंत्रण का तैयार हो रहा है तो दूसरा प्लान रामनगरी की 14 कोस की परिधि की भीड़ को लेकर है।
पिछले परिक्रमा मेले में 40 लाख भक्तों ने परिक्रमा की थी। मंदिर बनने के बाद यह संख्या बढ़ सकती है। ऐसे में परिक्रमा पथ पर भीड़ नियंत्रण के लिए क्या किया जाए, इसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
अधिकारी का कहना है कि इसके लिए हमने हाल ही में हुए प्रयागराज माघ मेले के भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था का अध्ययन किया है। हमारी एक टीम ने प्रयागराज जाकर इस पार काम किया है। इसके लिए हम देश के बड़े मंदिरों की व्यवस्था का भी अध्ययन कर रहे हैं।