प्रदेश के गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र ने कहा कि सूबे की जनसंख्या बढ़ रही है। इस अनुपात में पुलिसकर्मियों की तादात नहीं बढ़ी। यह सच है कि आवश्यकता के अनुपात में पुलिस की कमी है। लोग हम पर भरोसा करते हैं, लेकिन हम महिलाओं के प्रति संवदेनशील नहीं हैं।
उन्होनें कहा कि हम देवी की पूजा करते हैं और बेटी को बेटी मानते हैं, लेकिन बहू को बेटी की तरह नहीं मानते। यही मानसिकता महिला संबंधी अपराधों की रोकथाम के राह की बाधा बनी हुई है। यह बातें शनिवार को डोगरा रोजीमेंटल सेंटर में आयोजित परिक्षेत्रीय बालिका सुरक्षा की कार्यशाला में कहीं।
कार्यशाला में उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराध में अगर संवदेनशीलता बरती जाई तो अपराध खुद व खुद कम होते जाएगें और समाज में बदलाव दिखने लगेगा। अपनी बहू व बेटी ही नहीं सभी की बहू व बेटी के प्रति सम्मान की भावना लानी होगी।
उन्होंने कार्यशाला में मौजूद सभी पुलिस कर्मियों व अधिकारियों से संवेदनशील होने तथा महिलाओं के प्रति अपराध के मामलों में प्रभावी कार्रवाई की हिदायत दी। लखनऊ जोन के पुलिस महानिरीक्षक ए सतीश गणेश ने कहा कि थानों में महिलाओं के प्रति अपराध के मामले कम ही दर्ज मिलते हैं।
अमूमन थानों में महिला अपराधों के पांच-छह मामले ही दर्ज पाये गए हैं जो यह साबित करते हैं कि महिला अपराध के मामलों में लापरवाही व कोताही बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि अपराध को छिपाने अथवा हीलाहवाली करने से सुधार नहीं हो सकता है।
पुलिस की प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि महिला अपराध की विवेचना व कार्रवाई तथ्यपरक, तर्कसंगत व स्वच्छ विचार पर आधारित हो। कार्यशाला में डीआईजी राकेश साहू, एसएसपी मोहित कुमार, एसपी सिटी संकल्प शर्मा, एसपी देहात कुलदीप नारायण, बाराबंकी, अंबेडकरनगर, सुलातनपुर व अमेठी के अधिकारी मौजूद रहे।