अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देती महिला।
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गोसाईगंज में नगर की महिलाएं, बच्चे, बूढ़े रंग-बिरंगे परिधान पहनकर डीजे की धुनों पर नाचते गाते ठाकुराइन पोखरे पर पहुंचे। वहां अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया। वेदियों पर 11 प्रकार के फलों, फूल-माला के अलावा घरों में पकाए गये ठुकवा गुलगुला चढ़ाया। इसके बाद प्रसाद लोगों वितरित किया गया।
रौजागांव स्थित चीनी मिल प्रांगण में अधिकारियों, कर्मियों ने छठ पूजा का कार्यक्रम आयोजित किया। चार रंग सुशोभित मंडप में सूर्य नारायण का पूजन हुआ। व्यंजनों, मौसमी फलों, ईंख आदि के साथ सूर्य की आकृति वाले ठेकुआ का नैवेद्य चढ़ाया गया।
नये वस्त्रों के परिधान में महिलाओं ने सूर्य नारायण की प्रीति के लिए गायन वादन भी किया। ‘कोपि-कोपि बोलेलीं छठि मइया सुना महादेव। मोरा घाटे दुबिया उपरजि गइले, मकड़ी बसेढ़ लेले। हंसि-हंसि बोलेले महादेव सुना ए छठि मइया, हम राउर दुबिया छिलाई देबों चनन छिरिक देबों’ जैसे गीत सुनकर सभी भावुक हो उठे।
महबूबगंज में श्रृंगी ऋषि आश्रम पर सरजू नदी के किनारे महिलाओं ने शाम को डूबते हुए सूर्य देवता को अपना प्रथम अर्घ्य अर्पित किया। सूर्य देवता अस्ताचल को हुए तो व्रती महिलाएं कमर भर पानी में हाथ जोड़कर खड़ी हो गई। परिवार के सभी पुरुषों ने बारी-बारी सूर्य भगवान को अर्घ्य अर्पित किया।