अयोध्या। रामनगरी में एक तरफ भव्य मंदिर आकार ले रहा है तो दूसरी तरफ यहां की संस्कृति व पौराणिकता को भी सहेजा जा रहा है। इसी बीच योगी सरकार ने ऐतिहासिक भवन दिलकुशा महल का नाम बदलकर साकेत भवन कर दिया है। रामनगरी में पहली बार किसी ऐतिहासिक भवन का नाम बदला गया है। 16़ 82 करोड़ से इसका जीर्णोद्धार किया जा रहा है। यह स्थल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
रामनगरी के पुनर्विकास में शामिल दिलकुशा महल जिसे अफीम कोठी के नाम से जाना जाता है। अब इतिहास का हिस्सा हो गया है। इसे अब साकेत सदन के नाम से जाना जाएगा। मंडलायुक्त गौरव दयाल ने अफीम कोठी का नाम बदले जाने की पुष्टि की है। चौदह कोसी परिक्रमा मार्ग पर धारा रोड मुहल्ले में स्थित अवध के नवाब शुजाउद्दौला की हवेली को पर्यटन स्थल के रूप विकसित करने की योजना है। इसे पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा, हवेली की पुरानी शान और शौकत को लौटाने का काम पर्यटन विभाग ने शुरू कर दिया है। इस क्षेत्र को हेरिटेज लुक दिया जा रहा है।
साकेत सदन के पुनर्विकास की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड को सौंपी गई है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरपी यादव ने बताया कि साकेत सदन के भवन की मरम्मत की जा रही है। जिस रूप में पहले बिल्डिंग थी पुनः उसी रूप में लाने का प्रयास होगा। यहां के पार्क का भी कायाकल्प होना है। 5 जून 2024 तक इसके सुंदरीकरण का काम पूरी करने की डेडलाइन तय की गई है।
इनके नाम भी बदले जा चुके हैं
इससे पहले योगी सरकार बनने के बाद सबसे पहले जिले का नाम फैजाबाद से बदलकर अयोध्या किया गया था। उसके बाद फैजाबाद जंक्शन का नाम परिवर्तित कर अयोध्या कैंट किया गया। अब दिलकुशा महल से अफीम कोठी हुई ऐतिहासिक इमारत का नाम साकेत सदन कर दिया गया है।
अफीम कोठी के नाम से थी पहचान
नवाब शुजाउद्दौला ने इस विरासत का निर्माण कराया था जिसे दिलकुशा महल कहा जाता था। अंग्रेजों ने सत्ता हस्तांतरण के बाद इसे नारकोटिक्स विभाग को सौंप दिया था। अंग्रेजी शासन में काल में भवन का नाम यहां अफीम रखे जाने के कारण अफीम कोठी नाम से यह प्रचलित हो गया था।