महंत आदित्यनाथ के राज में अखिलेश यादव का नाम लिखे थाली-गिलास बांटने के मामले में नए खुलासे होने शुरू हो गए हैं। मामले की जांच में सामने आ रहा है कि थाली-गिलास को लेकर संपूर्ण भुगतान अक्तूबर में ही निपट गया था।
कुल छात्र संख्या का 60 फीसदी एक लाख 14 हजार 629 बच्चों के लिए थाली-गिलास क्रय करने में एजेंसी को एक करोड़ 29 लाख 87 हजार 458 रुपये का भुगतान हुआ है। अब जांच के लिए एजेंसी को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
अमर उजाला की खबर पर शनिवार को डीएम ने थाली-गिलास के वितरण पर रोक लगाते हुए जांच के आदेश जारी किए थे। जांच कर रहे शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक सारा खेल लखनऊ से हुआ है। पहले आई थाली की खेप मानक के प्रतिकूल मिली थी, तौल में वजन कम होने पर डीएम ने वितरण रोकते हुए निर्धारित तौल की थाली-गिलास की आपूर्ति का आदेश दिया था।
लेकिन शासन में एजेंसियों की गहरी पैठ से इतना दबाव पड़ा कि बीएसए और लेखाधिकारी को बगैर संपूर्ण थाली-गिलास रिसीव हुए ही एक लाख 14 हजार 629 बच्चों के लिए थाली-गिलास का क्रय मूल्य मेसर्स दीवान एंड संस, लकरी-फजलपुर, मिनी बाई पास, दिल्ली रोड मुरादाबाद को प्रति सेट बर्तन मूल्य 113 रुपये 30 पैसे के हिसाब से एक करोड़ 29 लाख 87 हजार 458 रुपये का भुगतान करना पड़ा। यह कार्य अक्तूबर में ही हो गया।
बताते हैं कि जांच में खुलासा हुआ कि सरकार बदलने के बाद जांच एजेंसियों को कार्रवाई का अहसास हुआ तो आनन-फानन में आधे से अधिक रोके गए बर्तनों की आपूर्ति शुरू कर दी गई।
जिले के विभिन्न ब्लॉकों में ऐसे स्कूलों की तादाद काफी ज्यादा है, जहां पर थाली और गिलास नहीं पहुंचे हैं। प्राथमिक स्कूल पूरे पासिन के शिक्षक विजय कुमार यादव ने बताया कि अभी थाली-गिलास बच्चों को नहीं दिया गया।
प्रथम दृष्टया स्पष्ट हो रहा है कि थाली-गिलास क्रय के मामले में एजेंसी को संपूर्ण भुगतान हो चुका है। बीएसए से जवाब मांगा गया है कि बगैर सामान मिले, भुगतान क्यों हुआ। क्या मानक के अनुरूप सामान मिले हैं। बीएसए मामले की जांच कर पूरी रिपोर्ट जल्द देंगे। - विवेक, जिलाधिकारी