नवरात्र के आखिरी दिन बुधवार को ‘ऊॅ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै नम: स्वाहा और या देवि सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम: स्वाहा’ जैसे मंत्रों से घरों व मंदिरों में आहुतियों के साथ व्रत का पारण हुआ।
सुबह से ही स्नान-ध्यान के साथ उपासकों का तांता मंदिरों में लगा रहा। सामूहिक हवन के साथ हजारों श्रद्धालुओं के समवेत स्वर से सजी जय अंबे गौरी जय आनंद करनी, तुमको निसि दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव जी आदि जैसी चिर-परिचित स्तुतियां वातावरण को भक्ति भाव से सराबोर करने वाली रहीं। मंदिरों में कन्या पूजन की होड़ भी रही।
कई उपासकों ने घर में ही हवन किया। हवन-पूजन के केंद्र में छोटी देवकाली, जालपा देवी, बड़ी देवकाली, शीतला माता, पाटेश्वरी माता, मरी माता, हट्ठी महरानी आदि जैसी प्रतिष्ठित पीठ रही। यहां हजारों भक्तों ने क्विंटलों हवन सामग्रियों का उपयोग करते हुए हवन किया।
रिकाबगंज स्थित हट्ठी माता मंदिर, मरी माता मंदिर, शीतला माता मंदिर आदि स्थानों पर देर शाम तक प्रसाद वितरित होता रहा। नौ दिन का व्रत करने वाले व्रतधारी सिद्धपीठों, मां के मंदिरों के सामने और घरों में बने हवन कुंडों में देर रात तक हवन करते रहे। अनेक भक्तों ने मंगलवार को भी हवन किया था।