धर्मनगरी में मंगलवार को गुरु पूर्णिमा पर शिष्यों ने गुरु चरणों में नतमस्तक हो आस्था अर्पित की। गुरुधामों में उमड़े शिष्यों के भारी सैलाब से गुरु की महिमा-महत्ता प्रस्फुटित होती रही। देश के कोने-कोने से आए शिष्यों की भारी भीड़ से घंटों जाम लगा रहा, इससे भक्तों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सड़कों पर जलजमाव व उफनाई गंदगी को लोग कोसते नजर आए। भोर से ही गुरुचरणों का पूजन-अर्चन करने के लिए लोग कतारबद्ध दिखे। बंदउं गुरुपद कंज कृपा सिंधु नर रूप हरि/ महा मोह तम पुंज जासु कृपा रविकर निकर।
रामचरितमानस में वर्णित इस पंक्ति सहित संपूर्ण भारतीय चेतना में प्रतिपादित गुरु पद की महिमा-महत्ता गुरुपूर्णिमा के अवसर पर पूरी शिद्दत से शिरोधार्य हुई। गुरुपूर्णिमा की पूर्व संध्या से ही नगरी में श्रद्धालुओं की भीड़ गुरू पूजन के निमित्त गुरुस्थानों पर जुटने लगी थी।
भोर से ही सभी मंदिरों में शिष्यों ने गुरु की पूजा-आरती की और उनके प्रति समर्पण व्यक्त किया। सर्वाधिक भीड़ श्रीमणिराम दास जी की छावनी में देखी गई। शिष्य लंबी कतार में लगाकर श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष व श्रीमणिराम दास की छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास के पूजन के लिए कतारबद्ध रहे।
दशरथ महल बड़ा स्थान, उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली, श्रीराम बल्लभाकुंज, रंगमहल, श्रीतुलसीदास जी की छावनी, रामायणम् आश्रम, श्रीमंत्रार्थ मंडपम्, लवकुश मंदिर, सियाराम किला, तिवारी मंदिर नयाघाट, सद्गुरु सदन, विअहुति भवन, हनुमत सदन, हनुमान बाग आदि प्रमुख पीठों पर गुरु पूजन के लिए शिष्यों की भारी गहमागहमी रही।
प्रसिद्ध दिगंबर अखाड़ा में भी शिष्यों की भीड़ गुरुपूजन के लिए उमड़ी, जहां एसओसी राजेश त्रिपाठी ने शिष्यों का स्वागत किया। शिष्यों की इस भीड़ में संत-धर्माचार्यों से लेकर न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारी, कृषक, व्यवसाई, नौकरी पेशा, राजनीतिज्ञ, शिक्षक, अधिवक्ता आदि विभिन्न वर्ग के लोग शामिल रहे।