फैजाबाद में गुरुवार को रोडवेज परिसर में अमर उजाला के सियासी अड्डा में मौजूद लोग।
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शहरी भी थे और गांव वाले भी। गांवों में बिजली, खंड़जा, राशन कार्ड, नाली आदि पर ग्रामीणों ने खुलकर बात रखी जबकि शहरी लोगों ने भी विकास से लेकर अन्य मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सरकारी योजनाओं का लाभ पात्रों तक नहीं पहुंचने की बात कहीं गई। वादा, दावा और लुभावनी बातों से सजग रहने तथा सिर्फ विकास को तवज्जों देने की बात लोगों ने कही। रोडवेज पर गुरुवार को सियासी अड्डा में शहरियों व ग्रामीणों ने बेबाकी से अपनी राय जताई।
ग्रामीणों का दर्द था कि चुने जाने के बाद नेता हम लोगों के दुख-दर्द में कम ही शरीक होते हैं। गांव में विकास कार्य हुए हैं तो उसमें भी भेदभाव किए जाने की बात सामने आई। एक व्यक्ति ने कहा कि जिनमें अर्हता है, उन तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ठीक से नहीं पहुंच रहा है।
एक व्यक्ति ने कहा कि नेताओं की ओर से लुभावने वादे किए जा रहे हैं लेकिन इन वादों से सजग रहकर मतदान करना है क्योंकि खैरात में जो धन बाटा जाएगा वह आखिरकार जनता का ही है। एक वक्ता ने कहा कि ऐसे नेताओं को तवज्जो देना है जिसके कथनी-करनी में ज्यादा अंतर न हो।
एक व्यक्ति ने कहा कि जाति और मजहब की बात फैलाने की कोशिशें की जा रही है लेकिन ऐसे लोगों को चुनाव के दिन सही समय पर अपने तरीके से जवाब देंगे। विभिन्न दलों में बढ़ रही दलबदलू संस्कृति को लोकतंत्र के लिए अशुभ बताते हुए एक व्यक्ति ने कहा कि यदि हमारे पास जनप्रतिनिधि चयन के लिए विकल्पों का अभाव रहेगा तो आखिरकार नोटा की बटन तो है ही। उसी का प्रयोग करेंगे।
एक व्यक्ति ने फैजाबाद और अयोध्या को उसके प्राचीन स्वरूप को निखारने पर बल देते हुए कहा कि दोनों नगरों के नाम पर राजनीति ज्यादा की गई। शिलान्यास तो हो गए, लेकिन वह योजना धरातल पर नहीं दिख रही है। नागरिक सुविधाओं की कमी पर सवालों के तीर नेताओं की ओर खूब चले। एक वोटर ने कहा कि अभी तक ठीक से नागरिक सुविधाए तक नहीं मिल पाई है। जनप्रतिनिधि ऐसा हो जो नागरिक सुविधाओं को देने पर विशेष ध्यान दे।