अयोध्या। चौथे दीपोत्सव ने फिर रामनगरी में त्रेतायुग को जीवंत किया। अमावस्या की पूर्व संध्या पर प्रतीक रूप में भगवान राम, लक्ष्मण व सीता के साथ गुरू वशिष्ठ स्वरूप भी पुष्पक विमान की तरह सजे हेलीकॉप्टर से अयोध्या में उतरे तो रामनगरी निहाल हो उठी।
आसमान से हो रही पुष्पवर्षा, अनवरत शंखनाद, जय श्रीराम का उद्घोष, रामधुन व मंत्रोच्चारों के बीच अयोध्यावासियों ने अपने आराध्य का भव्य स्वागत किया। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य, शीर्ष संतों समेत आला अधिकारी और अतिथियों ने भगवान राम का तिलक कर उनकी भव्य अगवानी की।
लंका विजय व 14 वर्ष के बनवास से लौटे भगवान राम के स्वागत में इस बार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास का बीमारी की वजह से न उपस्थित होने का दर्द खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बयां किया।
कहा कि वे मेदांता में सघन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं। इस अवसर पर संपूर्ण अयोध्यावासी उनके स्वस्थ होकर आने की कामना करते हैं। शाम पौने 4 बजे पुष्पक विमान से भगवान राम, सीता व लक्ष्मण सरयू तट पर उतरते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उनकी अगुवानी करते हैं।
राम-सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुहन व हनुमान और अन्य स्वरूपों के साथ रथ पर सवार होकर रामकथा पार्क में बने मंच पर पहुंचे तो जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा पंडाल गूंज उठा। इस दौरान काट बनवास 14 वर्ष का आज राम अयोध्या में आए...रामजी की निकली सवारी, राम जी की लीला है न्यारी...का गीत सभी को भावविभोर करता रहा, एक-एक हृदय में रामधुन बज रही थी।
यहां पहुंचते ही चहुंओर शंखध्वनि, जय श्रीराम का उद्घोष त्रेतायुग को जीवंत करता प्रतीत हुआ। भगवान राम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक वैदिक मंत्रोच्चारों व रामधुन के बीच मुख्यमंत्री द्वारा होता है, मुख्यमंत्री, राज्यपाल समेत अतिथियो ने भगवान राम-सीता व लक्ष्मण की आरती उतारी तो संपूर्ण रामकथा पार्क राममय हो उठा। लोग भाव विह्वल हो उठे।
इस दौरान रामचरित मानस की ये पंक्तियां भी चरितार्थ होती दिखती हैं....जनकसुता समेत रघुराई, पेखि प्रहरषे मुनि समुदाई। वेद मंत्र तब द्विजन्ह उचारे। नभ सुर मुनि जय जयति पुकारे। प्रथम तिलक बसिष्ट मुनि कीन्हा। पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा....। डिप्टी सीएम, जिले के सभी जनप्रतिनिधि व संत-धर्माचार्यों ने भी भगवान राम के राजतिलक के बाद उनकी भव्य आरती उतारी। इस दौरान मौजूद यह दृश्य देखकर अभिभूत हो गए। बोले कि इस दिव्य पल का साक्षी बन अभिभूत है, रामराज्य की कल्पना मात्र से ही मन रोमांचित हो उठा है, ऐसा महसूस हो रहा है जैसे कि जीवन का कोई सपना साकार हुआ है। कलियुग में त्रेतायुग की झलक महसूस होने लगी है।