अयोध्या स्थित मठ-मंदिरों में प्रसाद के रूप में गट्टा और इलायची दाना खूब चढ़ाया जाता है। श्रद्धालु यहां से प्रसाद लेकर अपने घरों को जाते हैं। गट्टा और इलायची दाना में शाइनिंग लाने के लिए जिस प्रकार के केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है वह जानलेवा साबित होगा। खाद्य विश्लेषण की केन्द्रीय प्रयोगशाला ने इसे मानव स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित बताया है। अब गट्टा बेचने वाले पर कार्रवाई के लिए पत्रावली तैयार की जा रही है।
सावन झूला मेला के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने नयाघाट स्थित विनोद कुमार केसरवानी की दुकान से गट्टे का नमूना सील किया गया था। इस दुकान पर भारी मात्रा में गट्टा व इलायची दाना स्टोर किया गया था। तत्कालीन अभिहित अधिकारी वीके पांडेय की अगुवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारी सूर्यमणि ने नमूना सील किया था।
पहले यह नमूना जांच के लिए प्रदेश प्रयोगशाला में भेजा गया था। वहां से जो रिपोर्ट आई उसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं दर्शायी गई थी। अभिहित अधिकारी को संदेह हुआ था। साढ़े पांच हजार की शुल्क जमा कर केन्द्रीय लैब में नमूने की फिर से जांच के लिए भेजा।
केन्द्रीय प्रयोगशाला गाजियाबाद जो रिपोर्ट दी वह चौंकाने वाली है। गट्टा मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं है। गट्टे में शाइनिंग लाने के लिए जिस प्रकार के केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।