100 बेड के अस्पताल चालू करके सभी इंतजामों का दावा करते हुए स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से दिए गए हलफनामे पर मंगलवार को याचिकाकर्ता की आपत्ति की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हकीकत परखने के लिए तीन सदस्यीय कमीशन भेजा है।
कमीशन के सदस्य मंगलवार शाम साढ़े सात बजे से अस्पताल पहुंच बारीकी से जांच, बयान व वीडियोग्रॉफी-फोटोग्रॉफी से सरकार के हलफनामे की हकीकत खंगाल रहे हैं।
याचिकाकर्ता मुरलीधर चतुर्वेदी का कहना है कि अब सरकार के दावे की हकीकत खुलेगी। बुधवार को कमीशन हाईकोर्ट में रिपोर्ट देगी। जिस पर अगले ही दिन सुनवाई होगी।
कूढ़ाकेशवपुर निवासी मुरलीधर चतुर्वेदी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मंडलीय अस्पताल के बनने की समय सीमा तीन वर्ष पहले ही समाप्त होने के बाद भी अस्पताल शुरू नहीं होने का मुद्दा उठाया था।
मामले में न्यायालय के आदेश के बाद सात अगस्त को मंडलीय चिकित्सालय को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ से लोकार्पित किया।
इसी के साथ कागज पर तमाम सुविधाएं होने का दावा करते हुए स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से हाईकोर्ट में हलफनामा दे दिया गया।
लेकिन अस्पताल का निर्माण अधूरा होने की वजह से महज 100 बेड के अस्पताल का संचालन हुआ है और इतने ही बेड की मान्यता मिली है।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अस्पताल का सही ढंग से संचालन नहीं किए जाने, अस्पताल में मरीजों की भर्ती नहीं होने और ट्रॉमा सेंटर शुरू नहीं किए जाने की पुर्नयाचिका दायर की।
याचिकाकर्ता का कहना है कि मंगलवार को सुनवाई हुई तो कोर्ट ने हकीकत जानने के लिए तीन सदस्यीय कमीशन नियुक्त किया। कमीशन में शामिल वरिष्ठ अधिवक्ता अभीत सरन, याचिकाकर्ता के वकील अरुण कुमार पांडेय व उनके जूनियर एक अधिवक्ता हाईकोर्ट के आदेश से मंगलवार शाम सीधे मंडलीय अस्पताल दर्शननगर पहुंचे।
बंद कमरे में अस्पताल के रिकॉर्ड देखे गए। तीन तलों की जांच की गई। कई विभागों में ताले बंद थे। डॉक्टरों व स्टाफ की तैनाती को लेकर जानकारी ली गई। भर्ती मरीजों को देखा गया।
जांच कक्षों को जांचा गया। अस्पताल के सीएमएस व स्टाफ समेत सीएमओ व एडी के भी बयान दर्ज किए गए। इस दौरान अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. एचएन तिवारी एसडीएम सदर अमित कुमार, सीएमएस डॉ. एके सिंह, अधीक्षक डॉ. अरविंद सिंह आदि मौजूद रहे। देर शाम सीएमओ डॉ. आरएस यादव ने कहा कि जांच चल रही है।