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सिपाही समेत तीन को रिहा करने का आदेश, जेए सस्पेंड

Sat, 07 May 2016 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
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 डीएम के आयुध अधिनियम के मामले में अभियोजन स्वीकृति न देने से निर्धारित समयावधि में कोर्ट में आरोपपत्र नहीं दाखिल हो सका। मामले में कोर्ट ने जेल में बंद सिपाही समेत तीन आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया है। यह आदेश जेएम चिंताराम की कोर्ट से हुआ है।
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उधर इस आदेश के बाद शुक्रवार को डीएम ने कलेक्ट्रेट के न्याय सहायक (जेए) यशवीर सिंह सेठी को स्वीकृति के लिए फाइल पेश न करने पर निलंबित कर दिया। मामला महराजगंज थाने से दरोगा की सर्विस रिवाल्वर व छह बंदूकों के गायब होने का है।

28 फरवरी 2016 को सुबह महराजगंज थाने में तैनात दरोगा अरविंद कुमार के कमरे से उनकी सर्विस पिस्टल, दो मैगजीन और 20 कारतूस गायब हो गया था। मामले में दरोगा अरविंद ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। प्रकरण के खुलासे के लिए थाना पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच की स्वाट टीम को लगाया गया था।
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दोनों ने बीते 4 मार्च की शाम मया तिराहे के पास से थाने पर तैनात सिपाही मो. शाहिद निवासी हस्सू जनौरी पटरी थाना पटहेरवा जिला कुशीनगर व संदीप तिवारी और सत्यम शुक्ला उर्फ आशीष शुक्ला निवासीगण रमन पट्टी रामपुर मया थाना महराजगंज को गिरफ्तार किया।

तलाशी में सिपाही शाहिद से दो एसबीबीएल बंदूक फैक्ट्री मेड, दरोगा की चोरी गई सर्विस पिस्टल, दो मैगजीन व 13 कारतूस व एक खोखा कारतूस और 1200 रुपये, संदीप के कब्जे से दो एसबीबीएल बंदूक फैक्ट्री मेड व 800 रुपये तथा सत्यम के पास से दो एसबीबीएल बंदूक फैक्ट्री मेड बरामद हुआ।

आरोपियों ने बताया था कि बरामद बंदूकें थाने के मालखाने से गायब की गई हैं। जो मुंशी विनोद यादव व सिपाही शाहिद की मिलीभगत से गायब की जाती थी और आशीष के माध्यम से बाहर पहुंचा दी जाती थी। पकड़े गये लोगों ने मुंशी विनोद के साथ रमन पट्टी रामपुर मया निवासी दुर्गेश शुक्ला और तारगौहान निवासी दुर्गा वर्मा का नाम बताया था।

जिनकी तलाश कराई जा रही है। सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। दरोगा सोहनलाल पुष्कर ने विवेचना बाद अभियोजन चलाने के लिए डीएम से स्वीकृति मांगने के लिए पत्रावली उनके यहां भेज दी। यहां से स्वीकृति नहीं दी गई। बीती पांच मई को कोर्ट में अर्जी दी गई कि स्वीकृति के लिए फाइल डीएम के यहां बीते 11 अप्रैल को भेज दी गई है।

विवेचक दो दिन की छुट्टी पर गए हैं। आरोपपत्र दाखिल करने को समय दिया जाए। कोर्ट में आरोपपत्र गिरफ्तारी से 60 दिन के अंदर दाखिल नहीं किया गया। आरोपी शाहिद के अधिवक्ता सईद खान और सत्यम व संदीप तिवारी के वकीलों ने कोर्ट में अर्जी दी कि अभियुक्त इस केस में बीते पांच मार्च से जेल में बंद हैं।

इनके खिलाफ अभी तक आरोपपत्र दाखिल नहीं की गई। अभियुक्तों की रिमांड अवधि 4 मई को पूरी हो गई है। इस कोर्ट ने आरोपियों को 20 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। इधर, डीएम किंजल सिंह ने बताया कि अभियोजन स्वीकृति के लिए फाइल मेरे सामने आई थी।

उसमें कुछ प्रपत्रों की कमी दिखी तो इसे पूरा करते हुए प्रस्तुत करने का निर्देश न्याय सहायक (जेए) को दिया था। जेए ने दोबारा उनके समक्ष पत्रावली प्रस्तुत ही नहीं की। प्रकरण में जेए बाबू की लापरवाही के मद्देनजर उसे सस्पेंड कर दिया गया है।
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