एक हजार के नोट दिखाते कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
केंद्र सरकार की ओर से पांच सौ और हजार के पुराने नोट बंद किये जाने के बावजूद व्यवस्था से खिलवाड़ बंद नहीं हो रहा है। सोमवार को अस्पताल के ठेका सफाई कर्मियों को बंद हो चुके एक-एक हजार के नोट मजदूरी में बांटे गए। इसे लेकर सफाई कर्मियों में आक्रोश है, मगर ठेका फर्म के लोग नोट न लेने पर काम से निकालने की धमकी देते दिखे।
प्रदेश की समाजवादी सरकार ने सरकारी अस्पताल की साफ-सफाई का ठेका प्राइवेट फर्म को दे रखा है। जिले के सरकारी अस्पताल की साफ-सफाई का ठेका लखनऊ की प्राइम क्लीनिंग सर्विसेज को दिया गया है। फर्म की ओर से ही सरकारी अस्पताल की साफ-सफाई कराई जाती है।
सोमवार को फर्म की ओर से सफाई कर्मियों को एक-एक हजार के पुराने नोट का भुगतान कर दिया गया। ठेका सफाई पर तैनात सुपरवाइजर पप्पू और सफाईकर्मी सोनू का कहना है कि सोमवार को यहां कार्यरत सफाई कर्मियों को महीने का भुगतान किया गया।
वह भी एक-एक हजार के नोट दे दिये गये। अब इस नोट से खर्चा कैसे चले और इसे कहां चलाया जाए। रुपया देने वाले फर्म के मुकुल वर्मा का कहना है कि फर्म की ओर से एक-एक हजार का नोट भिजवाया गया है। इसको अपने-अपने खाते में जमा करवा दो।
सवाल उठता है कि जब वित्त मंत्रालय ने साफ हिदायत दी है कि हजार की नोट संबंधित व्यक्ति या पार्टी सीधे अपने बैंक खाते में जमा करे, तो यहां लखनऊ की प्राइम क्लीनिंग सर्विसेज के लोग कैसे इसे मजदूरी में बांच सकते हैं। जाहिर है कि कहीं न कहीं फर्म के लोग प्रदेश के सभी जिलों में करोड़ों रुपये खपाये जा रहे हैं।
फिलहाल जिला अस्पताल प्रशासन ने प्रकरण से पल्ला झाड़ लिया है। जिला अस्पताल से सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव का कहना है कि जिला अस्पताल प्रशासन को मतलब केवल नियमित साफ-सफाई से है।
भुगतान देना संबंधित फर्म का काम है। इस बाबत रकम भुगतान करने वाले मुकुल वर्मा का कहना है कि फर्म के मालिकों ने लखनऊ से उन्हें बांटने के लिए नकदी दी है, जिसे बांटा गया है, जबकि मजदूरों ने बैंक खाते दे रखे हैं।