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हाईटेक ठगी के अंतर्राज्यीय गैंग का पर्दाफाश, छह गिरफ्तार

Fri, 19 May 2017 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
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जिला पुलिस ने हाईटेक ठगी के अंतर्राज्यीय गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके बैंक खातों से 11 लाख रुपये से ज्यादा का संदिग्ध लेन-देन हुआ है।
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गिरोह का सरगना समेत पांच लोग पुलिस के हाथ नहीं लगे। मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस ने इनकम टैक्स विभाग के साथ संबंधित प्रदेशों की पुलिस से भी सहयोग मांगा है। गिरोह का देश के पांच प्रदेशों में जाल फैला मिला है।    
  
एसपी सिटी उदय शंकर सिंह ने शुक्रवार को अपने कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि सिविल लाइन स्थित केनरा बैंक के प्रबंधक समीर लाहिड़ी ने नगर कोतवाली पुलिस को शिकायत दी कि कुछ खाता नंबरों पर संदिग्ध लेन-देन किया जा रहा है।
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इस बाबत चेन्नई स्थित बैंक शाखा से सूचना मिली है। जानकारी के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी व कूटरचना की धाराओं में केस दर्ज कर छानबीन शुरू की और संबधित खाताधारकों में से छह को बुलाकर पूछताछ की गई।

इसमें पता चला कि यह लोग एक गिरोह का हिस्सा हैं और लॉटरी अथवा जालसाजी कर बैंक ग्राहकों के खाते से ऑनलाइन हड़पी गई रकम इनके अथवा इनकी ओर से खुलवाये गये अन्य खातों में जमा कराई जाती है। गिरोह का सरगना इस रकम को विभिन्न प्रदेशों के अलग-अलग शहरों से निकासी कराता है।

पुलिस ने प्रकरण में नगर कोतवाली के देवकाली बाईपास निवासी सूरज गुप्ता, शिवनगर कालोनी निवासी दिनेश गुप्ता व पहाड़गंज घोसियाना निवासी मो. शमीम, अयोध्या कोतवाली के त्यौरा उपरहार दर्शन नगर निवासी राम सिंह मांझी और दर्शननगर स्वीट हाउस के पीछे निवासी संजय कृष्ण श्रीवास्तव, महाराजगंज के राजेपुर निवासी आनंदसेन यादव को गिरफ्तार किया है।

जबकि गिरोह के सरगना मोहम्मद फरहान, महाराजगंज के राजेपुर उपरहार पूरा बाजार निवासी सिकंदर, नगर कोतवाली के देवकाली धनीराम का पुरवा निवासी बलराम व कंधारी बाजार रिकाबगंज निवासी पंकज गुप्ता और अयोध्या कोतवाली के दर्शन नगर मोहतरिमनगर पाराखान निवासी मुराद अली फरार हैं।

उनकी तलाश की जा रही है। एसपी सिटी ने बताया कि इस गिरोह ने गुजरात, कोलकाता, बंग्लूरू, कर्नाटक सहित कुछ राज्यों में जालसाजी का नेटवर्क फैला रखा है। छानबीन में गिरोह से जुड़े लोगों के खाते से अब तक 11 लाख 39 हजार 417 रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी प्रकाश में आई है।

विस्तृत जांच के लिए संबंधित राज्य के आयकर विभाग और पुलिस से संपर्क किया जा रहा है। पकड़े गये व प्रकाश में आये लोगों के नाम-पते का सत्यापन कराया जा रहा है।
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