पूरा के हैंसा गांव के हिमांशु, सानिया तथा सोनैसा के सागर, नीतू, मुस्कान, कन्हैया, सुधाकर, रामयज्ञ, रामजगत ने पिछले पांच दिन से अपने स्कूल का मुंह नहीं देखा है। सिर्फ यही नौ बच्चे नहीं बल्कि यहां कुल 76 छात्र-छात्राएं हैं जिनके जीवन में शिक्षा का उजियारा नहीं फैल पा रहा है।
बच्चों से बात हुई तो उन्होंने अपना दर्द बयां किया। अभी भी ज्यादातर बच्चों के जेहन में 28 मार्च वाली घटना घर कर गई है जब उनके सामने ही बदमाशों ने स्कूल में धावा बोल शिक्षिकाओं को तमंचा सटा लूट लिया था।
कोमल मन पर इसका बड़ा गहरा प्रभाव पड़ा है। तभी से बदमाशों के भय से प्राथमिक स्कूल हैंसा में ताला लटक गया है और यहां की शिक्षिका 500 मीटर दूर आबादी क्षेत्र में एक दुकान पर बैठकर अपनी हाजिरी लगा रही हैं।
मालूम हो 28 मार्च को पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे पूरा बाजार ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हैंसा में तीन बदमाश घुसे और वहां पर ड्यूटी कर रही शिक्षिका अंजू सिंह व दो आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की कनपटी पर तमंचा लगा उनके जेवर छीन लिए।
जानापुर निवासी शिक्षिका अंजू ने उसी दिन महराजगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई। शिक्षक नेताओं ने घटना के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दी लेकिन हुआ कुछ नहीं। बदमाशों के दहशत से स्कूल बंद है।
शिक्षिका अंजू सिंह स्कूल पांच सौ मीटर दूर एक दुकान पर ड्यूटी टाइम आकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही है लेकिन स्कूल फिर से कैसे आबाद हो, इसकी फिक्र बेसिक शिक्षा महकमे को नहीं है और न ही शिक्षकों के नाम पर सियासत करने वाले शिक्षक नेताओं को ही इसकी चिंता है।
प्रशासन, पुलिस व शिक्षा महकमा सवालों के घेरे में है। एडी बेसिक/प्रभारी बीएसए रामशंकर ने बताया कि स्कूल बंद होना कतई ठीक नहीं है। तीन तारीख को प्रावि. हैंसा का संचालन पहले की तरह कराया जाएगा।
जरूरी होगा तो पुरुष शिक्षक की तैनाती की जाएगी। बीईओ एसआर वर्मा ने कहा कि घटना हो गई तो उसका असर रहेगा ही। पूरा में महिला शिक्षिकाओं की तादात ज्यादा है, आखिर पुरुष शिक्षक कहां से लाए।
उधर, महराजगंज के थानाध्यक्ष बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि बदमाशों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है। बच्चों और उनके अभिभावकों तथा शिक्षिकाओं को डरने की जरूरत नहीं है। सोमवार को पुलिस भेजी जाएगी।