रोडवेज में 6.61 लाख का एमएसटी घोटाला
फैजाबाद। परिवहन निगम की फैजाबाद शाखा में एमएसटी बनाने के नाम पर 6 लाख 61 हजार 682 रुपये का घोटाले सामने आया है। ऑनलाइन एमएसटी बनाने वाली ट्राइमेक्स कंपनी की ओर से तीन माह से कैश जमा न करने पर एआरएम अविनाश चंदने लेखाधिकारी जितेंद्र कुमार से जांच कराई तो घोटाले का खुलासा हुआ। अब वर्ष 2017 से लिए गए ठेका की जांच भी शुरू कर दी है। मामले में रोडवेज प्रशासन कंपनी के खिलाफ जांच के बाद केस दर्ज कराने की बात कह रहा है।
जांच सिर्फ तीन माह जनवरी से मार्च 2018 के दौरान बनी एमएसटी की गई है। अभी यह धनराशि और बढ़ सकती है। विभाग की ओर से वर्ष 2017 से लेकर अब तक की जांच शुरू कर दी है। आरोप ऑनलाइन एमएसटी बनाने वाली कंपनी ट्राइमेक्स पर है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से धनराशि तो जमा कराई है, लेकिन कैश परिवहन निगम में जमा करने में हेरफेर किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि पिछले एक साल से ठेकेदार कंपनी की ओर से एमएसटी बनाने की डिटेल परिवहन निगम को नहीं दी गई है।
वैसे परिवहन निगम की बसों की ऑनलाइन एमएसटी बनाने का ठेका पूरे प्रदेश में ट्राइमेक्स कंपनी को मिला हुआ है। ऐसे में जांच की आंच पूरे प्रदेश में कंपनी की गतिविधियों को दायरे में ला सकती है। फैजाबाद डिपो में ऑनलाइन एमएसटी बनाने वाले कंपनी के हेड की ओर एक साल से एमएसटी बनने की डिटेल नहीं दी गई। मार्च क्लोजिंग के समय विभाग के लेखाधिकारी की ओर से मामले को लेकर जवाब मांगा गया। इसके बाद भी कोई सार्थक पहल नही हुई। लेखाधिकारी जितेंद्र कुमार ने सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अविनाश चंद को पूरे मामले की जानकारी दी। मामले की जानकारी होने पर एआरएम ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए एलाटेड पासवर्ड से तीन माह की डिटेल निकाली। एआरएम अविनाश चंद की ओर से यह डिटेल लेखाधिकारी जितेंद्र कुमार को सौंपकर समीक्षा करने को कहा गया। इसके बाद लेखाधिकारी ने जब नेट से मिली रिपोर्ट व कैश जमा हुई रिपोर्ट का मिलान किया तो 6 लाख 61 हजार 682 रुपये कम कंपनी की ओर से जमा किए जाने की पुष्टि हुई। एआरएम ने नए सिरे से पूरे मामले की जांच के आदेश दिए है। अब वर्ष 2017 से लेकर वर्ष 2018 मार्च तक की बनी एमएसटी की जांच होगी।
एआरएम की ओर से भी हुई बड़ी चूक
एमएसटी बनाने की जिम्मेदारी ट्राइमेक्स कंपनी के पास जरूर है लेकिन निरीक्षण का जिम्मा सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक का है। इसके लिए परिवहन निगम ने एमएसटी बनाने वाली कंपनी के साथ एआरएम को भी लॉगिंग व पासवर्ड उपलब्ध कराता है। रोडवेज इम्पलाइज यूनियन के मंडलीय मंत्री का आरोप है कि अगर प्रतिमाह एआरएम की ओर से वेबसाइट खोलकर चेकिंग की गई होती तो परिवहन निगम को इस हानि से बचाया जा सकता था। उन्होंने वर्ष 2017 से लेकर अब तक के समस्त एमएसटी जारी की गई एमएसटी की जांच किए जाने की मांग की है।
एमएसटी घोटाले के पूरे मामले की जांच की विभागीय जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में रोडवेज को 6 लाख 61 हजार 682 रुपये की हानि पहुंचाने की बात सामने आई है। फिलहाल पूरे साल भर की जांच फाइनल होने के बाद ही कोई बात कही जा सकती है। मामले में पुलिस केस दर्ज कराया जाएगा।- अविनाश चंद, एआरएम, फैजाबाद डिपो