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फिर वर्दी पर लगी दाग, इंस्पेक्टर समेत चार सस्पेंड

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लापरवाही में थानाध्यक्ष व तीन सिपाही सस्पेंड
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अयोध्या। शासन की तमाम सख्ती के बावजूद पुलिस कार्यशैली नहीं सुधर रही है। रामजन्मभूमि थाने में दो दिन तक साधु के साथ हुई चोरी की रिपोर्ट नहीं लिखी गई, साथ ही पकड़े गए चोरी के आरोपी को छोड़ दिया गया। बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी न्याय न मिलने से क्षुब्ध साधु ने थाना परिसर में ही खुद को आग के हवाले कर लिया। उसे आनन-फानन जिला अस्पताल से मंगलवार देर रात लखनऊ रेफर किया गया। सिविल अस्पताल लखनऊ में भर्ती साधु की हालत अब स्थिर बताई गई है। मामले में एसएसपी ने मौके की जांच के बाद थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राजीव सिंह, एक हेड कांस्टेबल व दो कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है।
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श्रीराम अस्पताल में मंगलवार देर रात झुलसी हालत में पहुंचे भोपाल के रहने वाले साधु रामदास त्यागी (50) ने बताया कि एक हफ्ते पूर्व अयोध्या दर्शन के लिए आया था। तीन दिन पूर्व रविवार को हनुमानगढ़ी दर्शन के दौरान उसका बैग, बिस्तर समेत नकद 35 सौ रुपये गायब हो गए। उसने शक के आधार पर एक व्यक्ति को पकड़कर पुलिस को सौंपा। उसका आरोप है कि पुलिस ने आरोपी को लेन-देन के बाद छोड़ दिया। यही नहीं पुलिस ने उसका केस भी दर्ज नहीं किया। वह केस दर्ज कराने के लिए थाने का चक्कर काट रहा था, उसके पास वापस जाने व खाने के लिए पैसा नहीं था। इससे तंग आकर उसने थाने में ही अपने ऊपर पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली। बताया कि पुलिस वालों ने आग बुझाई व उसे अस्पताल में भर्ती कराया। मामले में एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया ने बताया कि साधु ने कुछ सामान व नकदी चोरी होने की बात बताई थी। उसने एक बुजुर्ग को पकड़कर उस पर चोरी का आरोप लगाते हुए पुलिस को सौंपा था। पुलिस ने तलाशी में उसके पास कुछ नहीं मिलने व पूछताछ में बेगुनाह पाए जाने के बाद उसे छोड़ दिया था। केस नहीं दर्ज करने की बात पर उन्होंने कहा कि पुलिस घटना की जांच कर रही थी। उन्होंने थाने में आग लगाने की बात से इनकार किया। मामले को गंभीरता से लेते हुए मंगलवार देर रात एसएसपी सुभाष सिंह बघेल ने थाने के प्रभारी निरीक्षक राजीव सिंह, हेड कांस्टेबल राम सुंदर पांडेय, कांस्टेबल चंद्रिका सोनकर व रवि सिंह को सस्पेंड कर दिया है। उनका कहना है कि पीड़ित की रिपोर्ट पर केस नहीं दर्ज करने पर कार्रवाई की गई है।
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