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आरोप पत्र दाखिल होने के बाद नहीं हो सकती अग्रिम विवेचना

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आरोप पत्र दाखिल होने के बाद नहीं हो सकती अग्रिम विवेचना
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अयोध्या। कोतवाली नगर के पॉक्सो एक्ट के मामले में कोर्ट ने आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के बाद भेजी गई फाइनल रिपोर्ट को निरस्त कर दिया है। यह आदेश अपर जिला जज प्रथम व पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अशोक कुमार की अदालत ने किया है।

मामले में हाईकोर्ट ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अग्रिम विवेचना का आदेश दिया था। जिस पर क्षेत्राधिकारी नगर धनंजय कुशवाहा ने अग्रिम विवेचना करके दोनों आरोपियों के पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट प्रेषित कर दी थी।
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अधिवक्ता सुभाष सिंह ने बताया कि कोतवाली नगर के एक मोहल्ले में 08 मार्च 2018 को मोहित राजपूत व आकाश शुक्ला ने किशोरी को बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया।

किशोरी के आधार कार्ड में फेरबदल करके उसकी आयु 18 वर्ष दिखाते हुए उसके साथ आर्य समाज पद्धति से विवाह किया। फर्जी कागजात के आधार पर विवाह का पंजीकरण करवा लिया। इसके बाद उसके साथ कई दिन तक दुष्कर्म किया।

फिर पीड़िता को दलित जाति का होने के कारण निकाल दिया। पीड़िता की मां की तहरीर पर अगवा करने, धोखाधड़ी व दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ। मामले में विवेचना के बाद क्षेत्राधिकारी नगर धनंजय कुशवाहा ने आरोपपत्र अदालत में प्रेषित किया।

कोर्ट ने आरोप पत्र पर संज्ञान ग्रहण किया। आरोपी आकाश शुक्ला जेल में है, जबकि मोहित राजपूत बाहर है। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर मामले में अग्रिम विवेचना हुई और क्षेत्राधिकारी ने फाइनल रिपोर्ट अदालत में प्रेषित कर दी।
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कोर्ट ने वादिनी को समन भेजा और उसने कोर्ट में उपस्थित होकर फाइनल रिपोर्ट के विरोध में आपत्ति दाखिल की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फाइनल रिपोर्ट निरस्त करते हुए आरोपी मोहित राजपूत को विचारण के लिए तलब किया है।
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