रुदौली। एफआरयू दर्जा प्राप्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रुदौली में प्रसूताओं के लिए बेड पर न गद्दा है न ही चादर। गर्मी के बीच मरीज लोहे के बेड पर लेटने को मजबूर हैं।
सीएचसी की ओपीडी में रोजाना 500 मरीज आते हैं। अस्पताल में प्रतिमाह सवा दो सौ प्रसव हो रहे हैं। अस्पताल का चयन आयुष्मान भारत में भी किया गया है, लेकिन यहां सुविधाएं नदारद हैं।
शुक्रवार दोपहर तक महिला वार्ड के सामने रखा कूड़ादान गंदगी से पटा पड़ा मिला। महिला वार्ड के छह बेड में से तीन बेड पर गद्दा नहीं पड़ा था। जिन बेडों पर गद्दे पड़े थे, उन पर चादरें नहीं थीं। इससे मरीज फॉम के गद्दे पर चिपचिपी गर्मी से बेहाल दिखे।
मरीजों ने गिनाई परेशानी
बेड नंबर 1 पर भर्ती जलालपुर गांव की सुनीता ने बताया की अस्पताल में कोई सुविधा नहीं है। प्रसव के बाद बेड न 2 पर भर्ती बाबा का पुरवा सैदपुर की अफसरी बानो ने कहा की बेड पर चादर नहीं मिली।
चार पंखे में से एक चल रहा है। बेड नंबर तीन पर बहु को प्रसव कराने के बाद भर्ती कराने वाली पकड़िया गांव की सुशीला देवी ने बताया की वार्ड में गंदगी है। पंखे नहीं चल रहे हैं।
गर्मी में किसी की भी तबीयत बिगड़ जाए। पेट दर्द से कराह रहे भौली गांव के राम सवल की तीमारदारी कर रही पत्नी बीमार पति को जमीन पर चादर बिछा कर पड़ी रही। बताया की डॉ. मदन बर्नवाल ने इंजेक्शन लगवाया है।
सालभर से बना चाइल्ड केयर यूनिट ठप
एक वर्ष से बना चाइल्ड केयर यूनिट नहीं चल रहा है। जबकि इस यूनिट के लिए चार स्टाफ नर्स छह महीने से नियुक्त है। इमरजेंसी में स्टाफ नर्स की नियुक्ति नहीं है। चिकित्सकों के निजी स्टाफ के कर्मी अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों को इंजेक्शन लगा रहे।
जल्द ही अधीक्षक पद का दायित्व मिला है। सुधार के लिए प्रयास किया जा रहा। सभी स्टाफ को अपने काम को करने के आदेश दिए गए हैं। नई व्यवस्था का असर जल्दी दिखाई देगा।
डॉ पी के गुप्ता, अधीक्षक, सीएचसी