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अयोध्या में संपति विवाद को लेकर संत की हत्या

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अयोध्या में संपत्ति विवाद को लेकर महंत की हत्या
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अयोध्या। अयोध्या कोतवाली के रायगंज चौकी क्षेत्र अंतर्गत स्थित एक मंदिर के महंत को बांधकर तकिया से उसका गला घोंटकर कर हत्या कर दी गई। घटना के पीछे संपत्ति विवाद सामने आया है।

मंदिर पर कब्जेदारी को लेकर दो पक्षों में लंबे अर्से से विवाद चल रहा था। सावन मेले के दौरान बृहस्पतिवार की देर रात्रि महंत की हत्या की सूचना से हड़कंप मच गया।
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आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर एक आरोपी को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी गई। अयोध्या कोतवाली क्षेत्र के विद्याकुंड के पास स्थित विद्या मंदिर में बलिया जिले के महंत रामचरण दास (65) की हत्या कर दी गई।

महंत की लाश मंदिर के एक कमरे में मिलने से सनसनी फैल गई। घटना के पीछे मंदिर की कब्जेदारी का विवाद बताया जा रहा है, विवाद के चलते ही यहां एक सुरक्षागार्ड की भी तैनाती की गई थी।

प्रतिदिन की तरह सुरक्षागार्ड जब गुरुवार की रात 10 बजे ड्यूटी पर पहुंचा तो महंत रामचरण दास को आवाज लगाई, कोई उत्तर न मिलने पर जब वह मंदिर के अंदर कमरे में गया तो वहां कमरे में सारा सामान बिखरा पड़ा था।

किसी अनहोनी की आशंका से सुरक्षागार्ड द्वारा आला अधिकारियों को सूचना दी गई। सूचना पर एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया, सीओ अयोध्या राजकुमार साव, कोतवाली प्रभारी जगदीश उपाध्याय सहित अन्य पुलिस बल मौके पर पहुंचा। महंत की लाश चारपाई की नीचे मिली।

हाथ-मुंह और पैर बंधे हुए मिले थे। हत्या की सूचना पर देर रात्रि एसएसपी डॉ.मनोज कुमार व डीआईजी ओंकार सिंह ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जानकारी ली।

एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया ने बताया कि मृतक संत के करीबी शनि दास की तहरीर पर नामजद संत परमात्मा दास समेत दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

हत्या के पीछे संपत्ति विवाद का मामला सामने आ रहा है। फिलहाल सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए मामले की जांच की जा रही है। विद्या देवी मंदिर में वर्षों से संपत्ति विवाद चल रहा है।

संत रामचरण दास व आरोपी संत परमात्मा दास के बीच इस विवाद को लेकर कई बार मारपीट हो चुकी है। संत रामचरण दास साधक संत थे, वे खड़ेश्वरी मंदिर के पूर्वाचार्य भगवान दास खड़ेश्वरी के सादिक चेला बताए जाते हैं, उनके नाम मंदिर की वसीयत थी।

जिसके आधार पर वही महंती का दावा करते रहे। मंदिर के निचले हिस्से में रामचरण दास रहते थे जबकि मंदिर के दूसरी मंजिल पर परमात्मा दास ने कब्जा कर रखा था। कब्जेदारी को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने थे।
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कुछ ही महीनों पूर्व दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई थी। जिसमें पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किया था। 107/16 में दोनों पक्षों को पांबद भी किया जा चुका है। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन द्वारा यहां रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक के लिए एक सुरक्षागार्ड की तैनाती भी की गई थी।
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