फैजाबाद। वर्ष 1990 में सर्विस राइफल से ताबड़तोड़ फायरिंग कर कुक व दो सिपाहियों की हत्या करने और दो सिपाहियों को घायल करने के मामले में बर्खास्त सीआरपीएफ गार्ड को हत्या व जानलेवा हमले का दोषी पाते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर छह लाख रुपए जुर्माना भी किया है। जुर्माने की धनराशि में से मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपए व घायलों को 50-50 हजार रुपए देने का आदेेश भी दिया है। फैसला गुरुवार को अपर जिलाजज हरिनाथ पांडेय की कोर्ट से हुआ।
एडीजीसी अजय प्रकाश सिंह व के पी सिंह ने बताया कि घटना 29 दिसंबर 1990 की रात 10:30 बजे की है। सीआरपीएफ के सिपाही राजकुमार सिंह की डियूटी घटनावाले दिन क्वार्टरगार्ड कोर्ट संतरी के रूप में 10 बजे रात से 12 बजे रात तक लगाई गई थी। सिपाही ने अपनी सर्विस राइफल से सिपाही संतराम, सीताराम, कुक धन सिंह व विरदी चंद व हवलदार राजेंद्र प्रसाद पर जब वह सो रहे थे, तब ताबड़ तोड़ फायरिंग करके घायल कर दिया। घायलों को कंपनी कमांडर जीत सिंह ने श्रीराम अस्पताल अयोध्या पहुंचाया, जहां सिपाही संतराम व सीताराम मृत घोषित कर दिए गए जबकि सिपाही कुक धन सिंह, बिरदीचंद्र व हवलदार राजेंद्र प्रसाद को जिला अस्पताल ले जाया गया। जिला अस्पताल में धन सिंह की भी मौत हो गई। घटना के पूर्व राजकुमार ने कुक से दूध लाने के लिए कहा था, दूध न लाने पर घटना के दो दिन पूर्व 27 दिसंबर 1990 को झगड़ा हुआ था। जिसके विभागीय जांच से सिपाही राजकुमार सिंह परेशान होकर इस घटना को अंजाम दिया। कंपनी कमांडर जीत सिंह की तहरीर पर सिपाही के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट लिखाई गई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सिपाही को हत्या और जानलेवा हमले का दोषी पाया। सजा के प्रश्न पर सिपाही के अधिवक्ता सुधाकांत का तर्क था कि सिपाही के पिता 80 साल और मां 75 साल की वृद्ध हैं। पत्नी और दो साल की बच्ची है जिनकी देखभाल और पालन पोषण का जिम्मा सिपाही पर ही है, सजा में नरमी बरती जाय। इसके विरोध में बहस करने के लिए कोई एडीजीसी कोर्ट पर मौजूद नहीं था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।