थाईलैंड की अयोध्या में बनेगा भव्य राममंदिर
अयोध्या। विश्व के कई देशों में भगवान राम पूजे जाते हैं। रामलीला तो विश्व के लगभग 65 देशों में प्रचलित है। ऐसे ही एक देश थाईलैंड में आज भी भगवान राम की उपासना होती है।
थाईलैंड वासी भगवान राम को अपना पूर्वज मानते हैं। अयोध्या में राममंदिर के लिए दशकों से लोग भले ही इंतजार कर रहे हों, लेकिन थाईलैंड की अयोध्या अयुथ्थ्या में रामजन्मभूमि निर्माण ट्रस्ट द्वारा भूमि पूजन के बाद राममंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन हो गया है।
कार्यक्रम में शामिल हो बैंकाक से वापस अयोध्या पहुंचे रामजन्मभूमि निर्माण न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जन्मेजय शरण ने बताया कि कानूनी व संवैधानिक अड़चनों के कारण भारत के अयोध्या में राममंदिर निर्माण नहीं हो पा रहा है, मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
इसलिए हम लोगों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सद्भावना कायम हो इसको लेकर अयोध्या की तरह ही प्रभु श्रीराम की एक और नगरी अयुथ्थ्या में प्रभु के मंदिर निर्माण का संकल्प लिया है। इस कार्य में दुष्यंत सिंह व थाईलैंड से पवन मिश्र एवं विनोद हांडा का सहयोग है।
बताया कि मंदिर निर्माण मार्च 2019 के प्रथम सप्ताह से शुरू हो जाएगा। बताया कि बैंकाक में राममंदिर के निर्माण से भगवान राम की संस्कृति, मर्यादा एवं आदर्श का प्रचार-प्रसार विश्व व्यापी रूप लेगा।
बैंकाक में मंदिर के निर्माण का काम चाव फ्राया नदी के किनारे होगा, जो कि शहर के बीचोबीच बहती है। भारत में अयोध्या सरयू नदी के तट पर बसी है।
थाईलैंड में अयोध्या के नाम से शहर है, शहर के किनारे प्रसिद्ध सोराय नदी के तट पर श्रीराम का भव्य मंदिर बनाने को लेकर भूमि पूजन किया गया है।
दक्षिण पूर्व एशिया का बौद्ध बहुल देश थाईलैंड में धर्म के प्रति आस्था भी देखने को मिलती है। थाईलैंड के लोग न केवल हिंदु मंदिरों और देवताओं में गहरी आस्था रखते हैं बल्कि अपने राजा को भी राम का वंशज मानते हैं।
थाई संस्कृति एवं साहित्य का रामायण और राम से इस कदर जुड़ाव है कि यहां के राजा अपने नाम के साथ राम लगाया करते थे। थाईलैंड की राजधानी बैंकाक को महेंद्र अयोध्या भी कहते हैं। लोगों का मानना है कि यह इंद्र द्वारा निर्मित महान अयोध्या है।
यही कारण है कि थाईलैंड के जितने भी राम राजा हुए हैं सभी इसी अयोध्या में रहकर कार्य करते हैं। 18वीं शताब्दी में जब वर्मा के सैनिकों ने शहर पर कब्जा किया एक नए शासन का उदय हुआ।
उसने खुद को राम प्रथम कहाए एक शहर की स्थापना की जो आज बैंकाक के नाम से जाना जाता है। इसी राजा ने किम कियेन लिखी जिसे स्थानीय भाषा में रामायण कहा जाता है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय महाकाव्य का दर्जा दिया था।
थाईलैंड में रामकियेन पर आधारित नाटक और कठपुतलियों का प्रदर्शन देखना धार्मिक कार्य माना जाता है। राम कियेन में फ्र राम (राम) फ्र लक (लक्ष्मण) सुक्रीप (सुग्रीवद) ओन्कोट (अंगद) खोम्पून (जामवंत) जैसे चरित्र मिलते हैं।
थाईलैंड का राष्ट्रीय चिन्ह भी गरुड़ है। बैंकाक के हवाई अड्डा के स्वागत हाल के अंदर समुद्र मंथन का दृश्य बना हुआ है।