अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल व पूर्व प्रभारी कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक एमए अंसारी समेत तीन लोगों पर धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, दस्तावेजों में हेराफेरी जैसे गंभीर मामलों को लेकर नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह मुकदमा विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. अजय प्रताप सिंह की तहरीर पर दर्ज हुआ। प्रकरण की जांच तीन साल पहले एसआईटी व मंडलायुक्त ने की थी, और जांच के दौरान दोनों को दोषी पाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश भी दिए गए थे, मामला दबा हुआ था। वर्तमान में प्रो. जायसवाल बिहार के पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय नालंदा के कुलपति हैं, जबकि अंसारी सेवानिवृत्त होकर लखनऊ में रहते हैं।
कुलानुशासक प्रो. अजय प्रताप सिंह द्वारा रिपोर्ट दर्ज करने के लिए एसएसपी को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा नियंत्रक व प्रभारी कुलसचिव एएम अंसारी ने कुलपति प्रो. जीसीआर जायसवाल व अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत से विश्वविद्यालय को आर्थिक क्षति पहुंचाई। इस मामले में एसआईटी व मंडलायुक्त ने जांच की थी, जिसमें दोनों को दोषी पाया था।
मंडलायुक्त द्वारा की गई जांच की आख्या 7 जनवरी 2017 के आधार पर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए तत्कालीन कुलानुशासक प्रो. आरएन राय द्वारा एसपी सिटी को पत्र भेजा गया था, बावजूद इसके एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
वहीं, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 11 जुलाई 2020 को जारी पत्र में इन दोनों पर केस दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। मामले में एसएसपी आशीष तिवारी के निर्देश पर नगर कोतवाली में पूर्व कुलपति जीसीआर जायसवाल व प्रभारी पूर्व कुलसचिव एमए अंसारी के ऊपर धारा 419, 420, 467, 468, 471, 409 व 120बी के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। सीओ सिटी अरविंद चौरसिया ने बताया कुलानुशासक की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
धोखाधड़ी, कूट रचना, शासकीय धन का गबन व भ्रष्टाचार के आरोप
अवध विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. अजय प्रताप सिंह ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया है कि पूर्व परीक्षा नियंत्रक व प्रभारी कुलसचिव एएम अंसारी ने कुलपति जीसीआर जायसवाल की मदद से बगैर टेंडर व कोटेशन के अपने लिए वाहन व चालक उपलब्ध कराया। साथ ही लॉग बुक में प्रतिदिन 80 किलोमीटर की यात्रा दर्शाइ, जबकि उनका घर विश्वविद्यालय से महज डेढ़ किलोमीटर दूर है।
यही नहीं अंसारी ने यात्रा के नाम पर विश्वविद्यालय को लाखों रुपए की हानि पहुंचाई। अंसारी ने अपने कार्यकाल के दौरान नियम विरुद्ध व आर्थिक लाभ हासिल करते हुए कर्मचारियों का स्थानांतरण भी किया। उन्होंने अनुबंध से अघिक श्रमिकों का भुगतान करा कर लाखों हड़पे, साथ ही लैडिंग सहायक अखंड प्रताप सिंह का वेतन केंद्रीय पुस्तकालय कर्मचारियों के वेतन पर्ची के साथ सम्मिलित किए जाने की कूट रचना की। आरोप है कि गोपनीय प्रिंटिंग के नाम पर सुरक्षा एजेंसी अनुबंध व कैंप ऑफिस के नाम पर करोड़ों का वारा न्यारा किया गया।