अयोध्या। सप्ताह भर पहले गर्भवती के पेट में बच्चा मर गया, लेकिन सरकारी महिला डॉक्टर अपने निजी क्लीनिक पर उसका इलाज करती रहीं। शुक्रवार रात जुड़वा मृत बच्चे पैदा हुए तो मामले का खुलासा हुआ।
भुक्तभोगी के पति ने डॉक्टर के खिलाफ कोतवाली नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामला केएम शुगर मिल मसौधा की कॉलोनी से जुड़ा है।
कॉलोनी निवासी राकेश यादव ने अपनी पत्नी उर्मिला को तीन माह पहले सरकारी महिला चिकित्सालय की डॉ. सविता बांदिल के बांसमंडी स्थित माधव क्लीनिक में दिखाया था।
राकेश के मुताबिक डॉक्टर की सलाह पर ही वह पिछले तीन माह से इलाज करवा रहा था। इस दौरान दवाओं के साथ ही जो जांचें डॉक्टर ने लिखीं, उसने कराई।
28 नवंबर को राकेश अपनी पत्नी को एक बार फिर डॉ. सविता के क्लीनिक पर ले गया। यहां चेकअप के बाद डॉक्टर ने बताया कि सब ठीक-ठाक है। अगले दो-तीन दिन में बच्चे पैदा हो सकते हैं।
29 नवंबर को करीब चार बजे पत्नी को तेज दर्द हुआ तो उसने मोबाइल पर डॉक्टर से संपर्क कर समस्या बताई। सलाह के मुताबिक उसने दवाएं खिलाईं, लेकिन दर्द बढ़ता गया तो शाम लगभग 6:30 बजे वह पत्नी को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचे।
यहां मौजूद महिला डॉक्टरों ने चेकअप के बाद उसे बताया कि पेट में जुड़वा बच्चे हैं, लेकिन बच्चों की धड़कन नहीं मिल रही है। रात 09:30 बजे जुड़वा बच्चे मृत पैदा हुए तो डॉक्टरों ने कहा कि इनमें से एक बच्चे की मौत तो सप्ताह भर पूर्व ही हो गई थी। जबकि दूसरे की मौत एक दिन पूर्व हुई है। इस दौरान एक बार सरकारी महिला चिकित्सक डॉ सविता भी दो मिनट के लिए यहां पहुंची थीं।
राकेश ने नगर कोतवाली में डॉक्टर सविता बांदिल के खिलाफ तहरीर दे दी। कोतवाल नीतीश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि राकेश की तहरीर पर आरोपी डॉक्टर सविता बांदिल के खिलाफ आईपीसी की धारा-304 ए और 506 में रिपोर्ट दर्ज की गई है। नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
बच्चों की डॉक्टर ने किया गायनी का इलाज
जिला महिला चिकित्सालय में तैनात डॉ. सविता बांदिल यहां बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। बावजूद इसके उन्होंने गर्भवती महिला अर्थात गायनी के केस को हैंडल किया। अंतत: गर्भवती महिला के पेट में ही दोनों बच्चों की मौत हो गई।
जांच के लिए सीएमओ को लिखेंगे पत्र
डॉ सविता बांदिल बच्चों की डॉक्टर हैं। उनके इस कृत्य की शिकायत अभी नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए सीएमओ को पत्र लिखा जाएगा।
-डॉ एसके शुक्ला, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल, अयोध्या