पूर्व न्यायाधीश पलोक बसु द्वारा छह वर्षों से अधिक समय से चलाई जा रही अयोध्या विवाद के सौहार्द्रपूर्ण समाधान मुहिम आखिरकार अपने मुकाम पर पहुंच गई। पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में विवादित परिसर के रिसीवर व मंडलायुक्त से मिले प्रतिनिधिमंडल ने हिंदू व मुस्लिम पक्षों से हस्ताक्षरित दस हजार 502 पत्रकों को सौंपा। जस्टिस पलोक बसु ने कहा कि कमिश्नर इसे धारा 89 के तहत अयोध्या विवाद में सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेंगे, ऐसा आश्वासन उन्हें मिला है।
देर शाम कमिश्नर आवास से लौटते समय पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व न्यायाधीश पलोक बसु ने कहा कि अयोध्या विवाद को आपसी समझौते से हल करने के छह सूत्री प्रस्ताव के दस हजार 502 पत्रकों को विवादित परिसर के रिसीवर व कमिश्नर को सौंप दिया गया।
साथ ही मीटिंग के रजिस्टर की फोटो कॉपी भी सौंपी गई है। पूर्व न्यायाधीश ने बताया कि रिसीवर ने पत्रकों के साथ जो पैनल की रिपोर्ट थी उसे भी ले ली है। कहा कि कमिश्नर सूर्य प्रकाश मिश्र अब हस्ताक्षरित पत्रकों व रिपोर्ट को सीपीसी की धारा 89 के प्राविधान के अंतर्गत इस मामले पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट को सौंपेंगे।
कमिश्नर से मुलाकात करने गए प्रतिनिधिमंडल में महंत जन्मेजय शरण, आफताब रजा रिजवी, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, मंजर मेंहदी, सादिक अली, शोभा मित्रा, अब्दुल लतीफ, फरीद सलमानी, नागा रामलखन दास, खुर्रम खां, महंत राम टहल शरण वेदांती आदि मौजूद रहे।
... इधर विरोध के सुर हुए मुखर : पूर्व न्यायाधीश पलोक बसु के अयोध्या विवाद के सौहार्द्रपूर्ण समाधान मुहिम में चलाए गए पत्रक के विरोध में पत्रक अभियान छेड़ दिया गया है। अयोध्या-फैजाबाद मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मो. इकबाल ने मुहिम में पूर्व न्यायाधीश के सुलह समाधान मुहिम में कराए गए हस्ताक्षर को फर्जी करार दिया।
उन्होंने सुलह समाधान के विरोध में पांच हजार मुस्लिमों का पत्रक पर हस्ताक्षर करवाए जाने का दावा किया, कहा कि 15 नवंबर को एसोसिएशन के नेतृत्व में विवादित परिसर के रिसीवर व मंडलायुक्त को पत्रक सौंपा जाएगा। मो. इकबाल ने कहा कि पूर्व न्यायाधीश पलोक बसु से चलाए जा रहे सुलह समाधान मुहिम से मुस्लिम सहमत नहीं हैं।