शिक्षा क्षेत्र बीकापुर के तीन दशक पुराने सार्वजनिक जूनियर हाईस्कूल तोरोमाफी दाराबगंज में दो सौ छात्र/छात्राओं को पढ़ने के लिए स्कूल में घुसने ही नहीं दिया जा रहा है। इसके कारण बच्चों का भविष्य सड़क की पटरी पर क्लास लगाकर संवारा जा रहा है। विद्यालय प्रबंधकीय गुटबाजी का शिकार हुआ जिसके कारण 350 बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा है।
अंदरखाने में चल रहा विवाद दो दिन पहले सोमवार को सतह पर आ गया। सोमवार व मंगलवार से विद्यालय के छात्र/छात्राएं स्कूल के बाहर बैंक के पास सड़क की पटरी पर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं लेकिन बीएसए से लेकर बीईओ तक घटना से अनजान हैं। जबकि दोनों पक्षों से शिकायत मिलने पर चार दिन पूर्व दोनों गुट पर शांतिभंग की कार्यवाही की जा चुकी है।
बुधवार को दोनों गुटों को दुबारा तलब किया गया है। दो पक्षों में प्रबंधकीय विवाद के कारण दो सौ छात्र/छात्राएं स्कूल में घुसने नहीं पा रहे हैं। मंगलवार को करीब 80 बच्चे स्कूल के भीतर पढ़ रहे थे जबकि विद्यालय से जुड़े अध्यापक अंजली, मनशी, वंदना प्रिंस, ज्योति, सहित करीब 200 बच्चे विद्यालय से कुछ दूरी पर सड़क किनारे शिक्षा ग्रहण करते मिले।
अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है। अध्यापकों का आरोप है कि फीस वसूलने के बाद उनका वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। यही नहीं विद्यालय में उनको घुसने भी नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण मजबूरी में सोमवार से बच्चों को विद्यालय से कुछ दूरी पर पढ़ाया जा रहा है।
मामले की शिकायत डीएम, एसएसपी, बीएसए, एसडीएम, सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा और कोतवाली बीकापुर से की जा चुकी है लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकल सका है। इस मामले में बीएसए पन्नाराम गुप्ता का कहना है कि जानकारी नहीं है, विद्यालय का नाम नोट कराइए, पता लगाते हैं कि मामला क्या है।
बच्चों की शिक्षा विवाद के कारण प्रभावित न हो, इसका ध्यान दिया जाएगा। एसडीएम बीकापुर अरुण कुमार मिश्र ने भी कहा कि बच्चों के साथ खिलवाड़ गंभीर मामला है, इसकी जांच करायी जाएगी। कोतवाल ने बताया कि दोनों पक्षों से शिकायत मिलने पर चार दिन पूर्व दोनों गुट पर शांतिभंग की कार्यवाही की जा चुकी है। बुधवार को दोनों गुटों को दोबारा तलब किया गया है।