अयोध्या। शरद पूर्णिमा पर्व पर आज रामनगरी में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ेगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पावन सलिला सरयू में स्नान कर विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगे।
वहीं इस वर्ष भी ऐतिहासिक दंतधावन कुंड में साकेत भूषण समाज के तत्वावधान में क्षीरशायी भगवान की भव्य झांकी सजाई जाएगी। साथ ही अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। इसके साथ धारा 370 व चंद्रयान-2 की भी झांकी आकर्षण का केंद्र होगी।
अश्विन मास के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि इस साल 30 साल बाद शरद पूर्णिमा पर बेहद दुर्लभ योग बन रहा है। इस दिन रात्रि में अमृत की वर्षा होती है।
दंतधावन कुंड पर 125 वर्षों से झांकी सजाए जाने की परंपरा अनवरत चलती आ रही है। महोत्सव में जहां शेषनाग की शैय्या पर भगवान विष्णु शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण कर चतुर्भुज रूप में नौका विहार करते हैं।
माता लक्ष्मी उनकी चरण सेवा करती हैं। भगवान ब्रह्म उनकी नाभि से निकले कमल पर विराजमान होते हैं। देवर्षि नारद नौका विहार कर रहे भगवान श्री हरि के साथ-साथ विचरण करते हैं।
महोत्सव समिति से जुड़े नंदलाल गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष क्षीरशायी भगवान की झांकी के अलावा चंद्रयान-2 व धारा 370 पर आधारित झांकी भी आकर्षण का केंद्र होगी। भक्तों को 11 क्विंटल खीर का प्रसाद वितरण किया जाएगा।
शरद पूर्णिमा पर बन रहा गजकेसरी योग
आचार्य शिवेंद्र बताते हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पर बृहस्पति की दृष्टि पड़ने से गजकेसरी नाम का शुभ योग बन रहा है। जिसकी वजह से इस बार शरद पूर्णिमा का महत्व और अधिक बढ़ गया है। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन छोटा सा उपाय करने से भी बड़ी-बड़ी विपत्ति टल जाती हैं। शरद पूर्णिमा का व्रत विशेषकर लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन घर में जागरण करने से भी धन-संपत्ति में लाभ होता है। शरद पूर्णिमा के दिन खीर बनाकर मंदिर में दान करने से भी लाभ मिलता है। माना जाता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है।