राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) में हुए घोटाले की जांच को लेकर सीबीआई ने दस्तावेज तलब किए हैं। जिले में जितनी महिलाओं का प्रसव हुआ उससे करीब डेढ़ गुना अधिक को जननी सुरक्षा योजना में धन बांटा है।
वियरर चेक के माध्यम से धन का हस्तांतरण किया जाना था लेकिन विभागीय मिलीभगत के चलते बैंक से पैसा निकाल कर हजम कर लिया गया। इस बारे में सीबीआई द्वारा दस्तावेज तलब किए जाने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है।
सीबीआई ने वर्ष 2007 से 2012 तक एनआरएचएम के तहत कार्य और खर्च का ब्यौरा तलब किया है। सीबीआई के अफसरों ने जेएसवाई में प्रसूताओं को भुगतान किए गए धन का विवरण भी मांगा है।
इसमें वर्ष वार गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन और संस्थागत प्रसव की जानकारी मांगी है। जिन महिलाओं को जेएसवाई के धन का भुगतान किया गया उनके बारे में भी पूछा है।
इस जांच से स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। जांच में सामने आ चुका है कि 2010 में जिले में 68 हजार प्रसूताओं का रजिस्ट्रेशन करने का लक्ष्य रखा गया था।
विभाग ने 72 हजार प्रसूताओं का रजिस्ट्रेशन कर रिकॉर्ड बनाया। हद तो तब हो गई जब करीब एक लाख प्रसूताओं को जेएसवाई का चेक दे दिया गया। ऐसे कारनामे 2009 से लेकर 2012 तक किए गए हैं।
अब सीबीआई के अधिकारियों ने सीएमओ फैजाबाद से 2007 से लेकर 2012 तक प्रसूताओं को प्रोत्साहन दिए जाने का विस्तृत व्यौरा पीएचसी और सीएचसी वार मांगा है। सीबीआई के पत्र पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।