सीबीआई ने दवाओं के खरीद का बिल वाउचर और चश्मा के लिए ठेका लेने वाली फर्मों का भी विस्तृत ब्यौरा तलब किया है। सीबीआई की अधिकारियों की मौजूदगी से चार दिनों से स्वास्थ्य विभाग के अफसर हलाकान रहे।
प्रदेश में अंधता निवारण समिति के तहत मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए लेंस, दवा और चश्मा खरीदा जाता है। इसके अलावा स्कूल हेल्थ कार्यक्रम के तहत बच्चों के नेत्र परीक्षण कर चश्मा दिया जाता है।
चश्मा, दवा और लेंस की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई है। पता चला कि जितने मरीजों का ऑपरेशन नहीं हुए उससे अधिक लेंस और दवाओं की खरीद कर ली गई है।
वर्ष 2010-11 में एनआरएचएम के घोटाले का मामला उजागर होने के बाद सीबीआई ने अंधता निवारण समिति की जांच भी शुरू कर दी है। सीबीआई वर्ष 2007-08 से 2010-11 तक के दस्तावेेजों की जांच कर रही है।
जांच के दायरे में दो मुख्य चिकित्साधिकारी और एक उप मुख्य चिकित्साधिकारी का नाम सामने आया है। इन दो मुख्य चिकित्साधिकारियों के कार्यकाल में उपकरणों की खरीद की गई है। इस दौरान डॉ. लालमणि प्रसाद अंधता निवारण समिति कार्यक्रम के नोडल अधिकारी थे।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राधेश्याम यादव ने बताया कि सीबीआई के इंस्पेक्टर टीम के साथ आए थे। उन्होंने लेंस, दवा और चश्मा खरीद के जो भी दस्तावेज मांगे उन्हें उपलब्ध करा दिए गए है। जांच हो रही है। जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा।