अयोध्या। बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से शहर स्थित एक लॉन में किसान पखवाड़े का आयोजन किया गया। मेले में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक कमलेश यादव के निर्देशन में ओंकार सेवा संस्थान ने केले के रेशे से निर्मित उत्पादों का स्टॉल लगाया गया। केले के रेशे से बनी सामग्री लोगों के आकर्षण का केंद्र रही।
कमलेश यादव ने कहा कि जनपद में केला प्रमुखता से पैदा किया जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में पहली बार केले के रेशे से उत्पाद बनाने का कार्य शुरू किया जा रहा है। वर्तमान समय में केला रेशा निर्मित उत्पादों की विदेशों में मांग बहुत बढ़ रही है। संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सूर्य कुमार त्रिपाठी ने बताया कि केले की फसल होने के बाद बचा हुआ तना किसानों के लिए सिर दर्द बना रहता है। वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक एक एकड़ भूमि से केले का तना हटाने में लगभग तीस हजार रुपये की लागत आती है, जबकि एक एकड़ में केले के तने से रेशा निकाल कर बेचने पर दो लाख रुपये की आमदनी हो जाती है।
केले के तने से निकले रेशे से उत्पाद बनाकर बेचा जाए तो लगभग चार से पांच लाख रुपये मिल सकते हैं। केले के रेशे से बैग, स्लीपर, पूजा आसनी, योगा की चटाई, कैरी बैग आदि दैनिक जीवन की उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जा सकता है। केले के रेशे से बने कैरी बैग प्लॉसटिक बैग का विकल्प बन सकता है। इन वस्तुओं का निर्माण समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किया जाता है। इस मौके पर मिथिलेश, विद्यावती, देवेंद्र प्रताप शुक्ला, वैभव शुक्ला, निष्ठा शुक्ला आदि मौजूद रहे।