खरीफ की फसल के बोवाई का समय करीब है। किसानों ने धान की बेहन डालने के लिए खेतों की जुताई कर ली है। मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए खाद वगैरह डाल दी है। अब उन्हें धान की बेहन डालने के लिए पानी का इंतजार है।
नहरों में पानी तो है। मगर सिल्ट जमा होने से नहरों को पानी गांवों में बहने लगा है। इससे किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए जिले में 614 सरकारी नलकूप संचालित हैं।
मगर इनमें से 528 नलकूप ही चालू हालत में हैं, जबकि 86 नलकूप तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़े हैं। कई नलकूपों का जल स्तर घट जाने से पानी देना बंद हो गया है। आपरेटर के नदारद रहने से चालू नलकूपों से भी किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
इससे किसान धान की बेहन अभी तक नहीं डाल सके हैं। इससे धान की रोपाई का काम भी जहां पिछड़ने वाला है। वहीं धान की उपज पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। लिहाजा धान की अधिक पैदावार होने के आसार कम हैं। सिंचाई विभाग के अनुसार माह मई की शुरुआत से ही माह जून तक नहरें बंद रहती हैं।
यानी नहरों में इन दिनों पानी छोड़ने का नियम नहीं है। मगर तपिश के मद्देनजर लघु कृषकों को खेती की पैदावार के लिए एवं पशु-पक्षियों को गर्मी से बचाने के लिए 15 दिन पहले नहरों में सिंचाई विभाग ने पानी छोड़ा था। हालांकि नहरों की सफाई न होने से छोड़ा गया पानी नहरों से उफनाकर गांवों में भर गया।