आधी आबादी जब तक निर्भय नहीं है तब तक वह कैसे विकास की तेज रफ्तार में कदम से कदम मिलाकर चल सकती है? पहले तो वह निर्भय हो, तभी तो वह अपनी ऊर्जा का अधिकतम प्रयोग अपने सुनहरे भविष्य के निर्माण में कर सकेगी।
आधी आबादी की सुरक्षा के सख्त इंतजाम के साथ ही शिकायत होने पर तत्काल कार्रवाई की आवाज उठी। बुनियादी से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर हो रही साख में गिरावट को शिक्षा जगत के लिए अशुभ बताया गया। साख में गिरावट को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की गई।
सांस्कृतिक साक्षरता पर भी जोर दिया गया। कहा गया कि आम जन से लेकर नेता तक सब में सांस्कृतिक दृष्टि होनी चाहिए, तभी समाज और देश का संवहनीय विकास होगा। अमर उजाला ने मनूचा गर्ल्स डिग्री कॉलेज में शनिवार को कैंपस अड्डा में शिक्षिकाओं एवं छात्राओं ने खुलकर अपनी राय व्यक्त की।
संगीत के एक शिक्षक ने कहा कि हर शहर की एक पहचान हुआ करती है। अक्सर कला, साहित्य और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में यदि वहां की कोई शख्सियत है तो उस शहर के साथ उसका नाम चस्पा हो जाता है लेकिन सांस्कृतिक साक्षरता इस कदर कम हो गई कि लोगों को अपने चमकदार ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का ज्ञान ही नहीं है।
नेता ऐसा हो जो सांस्कृतिक रूप से खुद साक्षर हो तथा वह समाज को भी उस दिशा में ले जाने की इच्छाशक्ति रखता हो। एक शिक्षिका ने कहा कि आजादी के इतने वर्ष बाद भी समाज के आखिरी पांत में बैठे व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कराहट नहीं लाई जा सकी है।
आखिर ऐसा क्यों? उन्होंने ऐसे नेता को वोट देने की बात कही जिस तक आम जन की बात आसानी से पहुंच जाए तथा वह नेता भी आम जन तक पहुंचे। एक शिक्षिका ने आधी आबादी की सुरक्षा पर दर्द बयां करते हुए कहा कि मैं भी एक बेटी की मां हूं लेकिन लगता है कि आज भी हम सभ्य समाज में दाखिल नहीं हो पाए हैं। एक शिक्षिका ने गर्ल्स कॉलेज के आस-पास सादी वर्दी में पुलिस कर्मियों की तैनाती की मांग की। साथ ही शिकायत होने पर तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा की गई।
छात्राओं ने कहा कि शिक्षा के स्तर में सुधार होना चाहिए। एक छात्रा ने कहा कि युवा शक्ति के बारे में बात की जाती है लेकिन उसके रोजगार के लिए सही दिशा में संवेदनशीलता के साथ कोशिश नहीं की जा रही है। नागरिक सुविधाओं का भी मुद्दा उठा तथा इसके साथ ही सड़क और गलियों में हुए अतिक्रमण और उसके कारण हर वक्त लगने वाले जाम की समस्या के निदान की मांग की गई।