किराए के भवनों में जैसे-तैसे कागज की नाव चलाई जा रही है। कई भवन इतने जर्जर हैं कि कभी भी ढह सकते हैं। हाल यह है कि कान्वेंट से होड़ लेने में सत्र बदलने के अलावा यहां कोई बदलाव नहीं दिखता।
स्कूलों में संसाधन के साथ अध्यापकों की कमी से लोगों का इतना मोह भंग हो गया है कि इस सत्र में सभी स्कूलों में मात्र साढ़े तीन हजार बच्चों का नामांकन हुआ है।
जबकि कान्वेंट स्कूलों में यह संख्या हजारों में है। हाल यह है कि अधिकतर परिषदीय स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं।
बदले माहौल में शिक्षकों के सिर पर गैर शैक्षणिक कार्यों का बोझ बढ़ गया है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है आखिर एक शिक्षक क्या-क्या करे। पढ़ाए या बाबूगीरी करे। कान्वेंट स्कूलों के मुकाबले खड़े होने के विभागीय दावे यहां पर दम तोड़ते नजर आ रहे है।
चाहे व फैजाबाद हो या धर्मनगरी अयोध्या हर जगह बेसिक शिक्षा के बंटाधार होने की तस्वीरें नजर आ रही हैं। फैजाबाद व अयोध्या में प्राथमिक स्कूलों की तादात 43 और पूर्व माध्यमिक स्कूलों की संख्या 13 है। इन 56 स्कूलों में कुल 83 शिक्षक तैनात है।
जो मानकों से काफी कम हैं। स्कूलों के सापेक्ष शिक्षकों की कमी का नतीजा है कि नगर क्षेत्र में ज्यादातर स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहा है। 56 स्कूलों में तकरीबन 3500 छात्र/छात्राएं नामांकित है।
लेकिन इनमें जहां किराए के भवन में स्कूल चलते हैं, वहां तो छात्र/छात्राओं की तादात सिर्फ रस्म अदायगी भर रह गई है। परिषदीय शिक्षा की बदरंग तस्वीर के कारण अभिभावकों ने अपने बच्चों को यहां पढ़ाने के बजाय निजी स्कूलों में दाखिला कराने पर ज्यादा जोर देते है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे यहां पर ज्यादा संख्या में है। शहर में खुल निजी स्कूलों में जहां दाखिला लेने के लिए होड़ मची रहती है। वहीं परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को नए बच्चों के प्रवेश कराने के लिए विभागीय दिशा-निर्देश जारी किए जाते है। अभियान चलाए जाते है लेकिन नतीजा ढांक के तीन पात जैसा ही रहता है।
वेतन में सालाना खर्च हो रहे 3.32 करोड़
नगर क्षेत्र के 83 स्कूलों में 3500 बच्चों को पढ़ाने के लिए 56 अध्यापकों की तैनाती है। औसतन एक शिक्षक को सालाना चार लाख रुपया वेतन के तौर पर मिलता है।
यानि कि साढ़े तीन हजार छात्र/छात्राओं को पढ़ाने के लिए सालाना तीन करोड़ 32 लाख अध्यापकों को पगार देने में खर्च होता है। अन्य खर्चे नहीं जोड़े गए है। जिनमें मध्याह्न भोजन, निश्शुल्क स्कूली ड्रेस व किताबें आती है।
किराए के भवन में चलते नौ स्कूल
प्राथमिक स्कूल मोदहा, बछड़ा, सुल्तानपुर, देवकाली, सोनखरकुंड, स्वर्गद्वार और वेगमपुरा तथा जूनियर हाईस्कूल सोनखरकुंड आदि नौ स्कूल किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि भवन स्वामियों को किराया नाममात्र का ही मिलता है। कहीं पर डेढ़ सौ रुपया तो कहीं पर दो सौ रुपया, वह भी कई-कई माह तक बकाया रहता है।