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रामजन्मभूमि के आसपास ड्रोन उड़ाने पर पाबंदी, उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

Mon, 07 Dec 2020 09:23 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
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रामनगरी में भव्य राममंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। ऐसे में रामजन्मभूमि परिसर की सुरक्षा भी अब और सख्त कर दी गई है। जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने आदेश जारी कर रामजन्मभूमि परिसर सहित आसपास ड्रोन उड़ाने पर पाबंदी लगा दी।

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उन्होंने दो फरवरी 2021 तक श्रीराम जन्मभूमि परिसर के आसपास एंटी ड्रोन निषेधाज्ञा तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश जारी किया है। इस आदेश का उल्लंघन करने पर डीएम ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
 

डीएम ने अपने आदेश में बताया कि डीआईजी दीपक कुमार ने अवगत कराया है कि मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में शासन में विगत दिनों बैठक हुई थी। बैठक में विचार-विमर्श के बाद श्रीराम जन्मभूमि की सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर परिसर के आसपास एंटी ड्रोन निषेधाज्ञा जारी करने की अपेक्षा की गई है।

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जिसको देखते हुए धारा-144 में विहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए श्रीराम जन्मभूमि व परिसर के आसपास अयोध्या क्षेत्र के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। किसी व्यक्ति, संगठन, संस्था आदि द्वारा सक्षम मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना ड्रोन, मानवरहित हवाई वाहन आदि ऐसे सादृश्य उड़ने वाले उपकरण जिनके माध्यम से शूटिंग, सर्वे एवं हथियारों का प्रयोग किया जा सकता है, का संचालन पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा।

ये प्रतिबंध पुलिस विभाग पर लागू नहीं होंगे। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है जो आगामी दो फरवरी 2021 तक प्रभावी रहेगा। इस आदेश का प्रचार-प्रसार नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत पड़ने वाले थानों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करने का भी निर्देश दिया गया है।

नृपेंद्र मिश्र के सामने विशेषज्ञों ने पेश की ड्राइंग

सर्किट हाउस में मौजूद नृपेंद्र मिश्र। - फोटो : अमर उजाला
डीएम ने अपने आदेश में कहा है कि वर्तमान में मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया है जिस कारण परिसर की संवेदनशीलता और अधिक बढ़ गई है। मीडिया द्वारा भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है। मीडिया की आड़ में शरारती तत्व भी श्रीराम जन्मभूमि में ड्रोन का इस्तेमाल कर किसी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं। जिसको देखते हुए परिसर की सुरक्षा के लिए एंटी ड्रोन निषेधाज्ञा जारी करने का निर्णय लिया गया है।।

राममंदिर एक हजार वर्ष तक अक्षुण्ण बना रहे इसको लेकर ट्रस्ट गंभीर है। सोमवार को राममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने रामजन्मभूमि परिसर में राममंदिर निर्माण की तैयारी देखने के बाद सर्किट हाउस में करीब पांच घंटे तक बैठक की। दोपहर एक बजे शुरू हुई बैठक शाम छह बजे तक चली।

बैठक में सबसे अहम मुद्दा राममंदिर की मजबूत नींव को लेकर रहा। दरअसल जहां राममंदिर का निर्माण होना है वह सरयू नदी के निकट है और वहां 200 फिट नीचे तक भुरभुरी बालू मिल रही है। ट्रस्ट चाहता है कि राममंदिर की नींव ऐसी हो जो भूकंप आदि आपदाओं से सैकड़ों वर्ष तक सुरक्षित रहे।

ऐसे में सीमेंट की मजबूत नींव बनाने पर मंथन चल रहा है। बैठक में शामिल एलएंडटी, टाटा कंसल्टेंसी, आईआईटी चेन्नई, सीबीआरआई रुड़की सहित ट्रस्ट के तकनीकी विशेषज्ञों ने राममंदिर की मजबूत नींव को लेकर अपनी-अपनी ड्राइंग नृपेंद्र मिश्र के समक्ष पेश की।

ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बैठक के बाद बताया कि मंगलवार को एक बार फिर नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में बैठक होगी। सोमवार की बैठक में राममंदिर निर्माण कार्य को गति देने की कार्ययोजना पर मंथन किया गया। टेस्ट पिलर की रिपोर्ट भी सोमवार को एलएंडटी व टाटा कंसल्टेंसी के इंजीनियरों ने समिति अध्यक्ष के समक्ष पेश की है।

उम्मीद है कि जल्द ही नींव की डिजाइन फाइनल होने के साथ काम शुरू कर दिया जाएगा। बताया कि राममंदिर निर्माण कार्य की मासिक समीक्षा करने का भी निर्णय लिया गया है। बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, गोविंद देव गिरि, आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा आदि शामिल रहे।
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परिसर में देखी निर्माण कार्य की प्रगति

- फोटो : अमर उजाला
मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोमवार को सबसे पहले रामजन्मभूमि परिसर पहुंचकर निर्माण कार्य की प्रगति देखी। तकनीकी विशेषज्ञों व ट्रस्ट पदाधिकारियों ने उन्हें नींव का स्थल दिखाया। जहां खोदाई में 200 फिट नीचे तक भुरभुरी बालू मिल रही है।

उन्होंने टेस्ट पाइलिंग के तहत तैयार पिलर को भी देखा। इसके बाद रामजन्मभूमि परिसर स्थित विश्वामित्र आश्रम में करीब एक घंटे तक निर्माण कार्य की प्रगति सहित अन्य बिंदुओं की समीक्षा की। इस दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने उन्हें पूरी जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने राममंदिर के पत्थर तराशी के लिए चुने गए स्थान को भी देखा। उन्हें बताया गया कि जो पत्थर तराशे गए हैं उन्हें परिसर में पहुंचाने का काम चल रहा है।

सुझावों का अध्ययन कर रही समिति
ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर के अतिरिक्त शेष 65 एकड़ की भव्यता के लिए देशभर से पांच सौ से अधिक सुझाव आए हैं। इन सुझावों के अध्ययन के लिए एक विशेष कमेटी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि की अध्यक्षता में बनाई गई है। कमेटी में कई आर्किटेक्ट व विशेषज्ञ भी शामिल हैं जो देशभर से आए सुझावों का अध्ययन कर रहे हैं। शीघ्र ही शेष 65 एकड़ की भव्यता के लिए फाइनल स्वरूप सबके सामने आएगा।
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