डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा राम रहीम को यौन उत्पीड़न का दोषी करार दिए जाने के बाद भड़की हिंसा और जनहानि पर अयोध्या के संत-धर्माचार्यों ने तीखी नाराजगी जताई है। संतों का कहना है कि राम रहीम का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।
जिस तरह से हिंसा फैलाई गई, उससे यह नहीं लगता कि ये किसी पंथ या समुदाय को मानने वाले लोग हैं। संतों का कहना है कि ऐसे बाबाओं की वजह से संत समुदाय बदनाम हो रहा है। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वैसे भी संत बनने की एक व्यवस्था है, इससे जुड़े न आसाराम थे, न रामपाल और न ही राम रहीम।
बाबा रामरहीम के अनुयायियों द्वारा की गई हिंसा की कटु निंदा करते हुए हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास ने कहा है कि बाबा रामरहीम को उनके किए की सजा मिलनी ही चाहिए। उन्होंने इस मामले में कोर्ट के रूख का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था से ऊपर कोई भी नहीं है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं साक्षी महाराज द्वारा दिए गए बयान पर भी महंत ज्ञानदास ने नाराजगी प्रकट की। कहा कि साक्षी महाराज सांसद हैं वे जिस तरह से राम रहीम का समर्थन कर रहे हैं वह दुखद है। प्रधानमंत्री को ऐसे व्यक्ति को लोकसभा से बाहर कर देना चाहिए। कहा कि कोर्ट जनता की भावनाओं पर नहीं, साक्ष्य पर चलता है। रामरहीम का समर्थन करने वाले लोगों का बहिष्कार होना चाहिए।
जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य ने कहा कि यह द्रवित करने वाला घटनाक्रम है। कोई भी व्यक्ति अपने को बाबा घोषित कर देता है और जनता को लोभ देकर उसे अनुयायी बना लेता है। जिस तरह से बाबा राम रहीम के अनुयायी कृत्य कर रहे हैं वह संत समाज को बदनाम करने वाला है। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए।
रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि संतों का धर्म समाज का कल्याण करना है, लेकिन राम रहीम के अनुयायियों ने समाज में हिंसा फैलाकर संत की गरिमा को धूमिल करने का काम किया है। बाबा राम रहीम जैसे लोग संत शब्द की गरिमा को प्रभावित कर रहे हैं, ऐसे लोगों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
ज्योतिष गुरू स्वामी हरिदयाल मिश्र ने कहा कि बाबा राम रहीम ने संत समाज को अपमानित करने का काम किया है। कहा कि भाजपा सांसद साक्षी महाराज के विरुद्ध भी कार्रवाई की जानी चाहिए, जिन्होंने बाबा का बचाव करने का प्रयास किया। पूरे विवाद में जो लोग दोषी हैं उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास रामायणी ने कहा कि जैसा कृत्य राम रहीम ने किया है वह संत की श्रेणी में नहीं आता। ऐसे लोग अपने नाम के आगे बाबा और संत का शब्द जोड़कर अपनी इच्छाएं पूरी करते हैं तथा कानून के दायरे में आने पर समर्थकों से हिंसा करवाते हैं। ऐसे संतों के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।