यूनेस्को विश्व धरोहर में अयोध्या के शामिल हो जाने पर विशिष्ट पहचान मिलेगी। इसके लिए प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसके बाद एशियन कल्चरल लैंडस्केप एसोसिएशन का तीन दिवसीय सेमिनार विश्वविद्यालय परिसर में 23 से 25 अक्तूबर के मध्य किया जाएगा जिसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. शुंग क्यून किम भी भाग लेंगे।
यह बातें डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि में आयोजित एशियन कल्चरल लैण्डस्केप एसोसिएशन व श्री सरयू अवध बालक सेवा समिति की बैठक को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहीं। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रो. राणा पीबी सिंह, सचिव सर्वेश कुमार व समिति के विशिष्ट सचिव आशीष मिश्र ने प्रोजेक्ट प्रारूप के रूपरेखा की जानकारी दी।
प्रो. सिंह ने बताया कि 10 मूल्यों में से 8 मूल्यों पर प्रस्ताव पारित किया गया है। अयोध्या में वास्तु शिल्पित उत्कृष्ट कृति के कई उदाहरण अर्न्तनिहित हैं। पुरातात्विक प्रतिनिधित्व की निरन्तरता, जिसमें कनक भवन, हनुमानगढ़ी, नागेश्वरनाथ मन्दिर, छोटी व बड़ी छावनी और सप्तहरि मन्दिर उल्लेेखनीय हैं।
बाल्मीकि रामायण भवन की दीवार पर बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के 24 हजार श्लोक दर्शाए गए हैं, जो पूरे देश में केवल यहीं हैं। उन्होंने बताया कि अयोध्या का संबन्ध भारत के प्रमुख पांच धर्मों से है। अयोध्या में 2 हजार हिन्दू मन्दिर, 62 जातीय मन्दिर, सौ मुस्लिम धर्म स्थल, सिक्ख गुरूद्वारा, प्राचीन बौद्ध स्थल के प्रतीक और पांच जैन तीर्थंकराें के जन्म से सम्बन्धित मन्दिर प्रमुख हैं।
यह धर्म स्थल मानव मूल्य का परिचायक है। उन्होंने बताया कि पुरातात्विक साक्ष्यों के माध्यम से यह प्रमाणित हो गया है कि अयोध्या 8 सौ ई.पू. के बाद से निरन्तर अधिवासित रही है। रामकथा, रामलीला, रामनामी जाप और रामजन्म बधाई उत्सव जैसी परम्पराएं और रीति-रिवाज अयोध्या के सांस्कृतिक अमूर्त धरोहर का प्रदर्शन करती रही है। इस मौके पर डॉ. विजयेंदु चतुर्वेदी, प्रो. अजय प्रताप सिंह, डॉ. शैलेंद्र वर्मा, डॉ. राजेश सिंह कुशवाहा, डॉ. विनय मिश्रा व अन्य मौजूद रहे।