रामनगरी में होली का आध्यात्मिक रंग बिखरता है। संतों की होली में आम होली की तरह रंग-गुलाल तो होता है पर उसके केंद्र में आराध्य होते हैं। रामनगरी में प्रात: आराध्य को गुलाल अर्पित करने के साथ होली की शुरुआत होती है। मध्याह्न आराध्य को भांति-भांति के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। दोपहर में शयन के बाद भगवान को जगाने पर उन्हें नई पोशाक धारण कराई जाती है और उन्हें करीने से गुलाल लगाया जाता है।
तदुपरांत आराध्य के सम्मुख होली गीतों की महफिल सजती है। नगरी के हजारों मंदिरों में इस परंपरा का यथाशक्ति पालन होता है पर कनक भवन, मणिरामदासजी की छावनी, दशरथ महल बड़ा स्थान, रामवल्लभाकुंज, लक्ष्मण किला, जानकी महल, बिड़ला मंदिर, तिवारी मंदिर, नाका हनुमानगढ़ी में इस परंपरा का पूरे भाव से पालन होता है।
राममंदिर निर्माण शुरू होने की खुशी रामनगरी के उत्सव व त्योहारों में बयां हो रही है। इस बार रामलला के दरबार में होली पूरी भव्यता के साथ मनाई जाए, ऐसी योजना बना रही है। इसके लिए रामजन्मभूमि के पुजारियों से बात कर कार्यक्रम की तैयारी की जाएगी। राममंदिर निर्माण शुरू होने से अयोध्या के उत्सव एवं परंपराओं की भव्यता लौटी है।
- डॉ. अनिल मिश्र, ट्रस्टी श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट