अयोध्या। राममंदिर निर्माण से पहले अयोध्या की धार्मिकता का प्रधान केंद्र माने जाने वाले रामकोट का भूगोल भी बदल जाएगा। श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने श्रीरामजन्मभूमि परिसर के 108 एकड़ में विस्तारीकरण के लिए मुहिम तेज कर दी है। विस्तारीकरण की जद में रामकोट के कई मठ व मंदिर भी आ रहे हैं। जो निकट भविष्य में या तो राममंदिर परिसर का हिस्सा हो जाएंगे या फिर नया स्वरूप धारण कर लेंगे। विस्तारीकरण के लिए ट्रस्ट ने रामजन्मभूमि परिसर से सटे मंदिरों, घरों और खुली जमीन के मालिकों से भूमि खरीदने के लिए वार्ता शुरू कर दी है। अभी तक भूमि-भवन की रजिस्ट्री कराई गई है।
विस्तारीकरण के ही क्रम में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अशर्फी भवन के पास स्थित 7285 वर्ग फीट जमीन दीप नारायण से एक करोड़ में खरीदी है। मंदिर परिसर के समीप ही स्थित आठ बिस्वे की एक और जमीन भी ट्रस्ट के द्वारा बैनामा कराने की बात सामने आ रही है। यह भी बताया जा रहा है कि अन्य कई जमीन मालिकों ने भी अपनी सहमति दे दी है। यही नहीं सुंदर सदन, फकीरे राम मंदिर को भी ट्रस्ट परिसर में शामिल करने में लगा हुआ है। इनके मालिकों से वार्ता चल रही है। दूसरी तरफ पूर्व दिशा में रामगुलेला मंदिर को भी लेने की तैयारी है। श्रीरामजन्मभूमि परिसर में मंदिर सहित कई प्रकल्पों के निर्माण की योजना भी ट्रस्ट ने बना रखी है।
ट्रस्ट का मानना है कि राममंदिर बनने के बाद वर्तमान की अपेक्षा दो गुना करीब एक लाख यात्री प्रतिदिन अयोध्या आएंगे। ऐसे में उनके लिए बेहतर व्यवस्था करने की तैयारी है। ट्रस्ट ने मंदिर के अलावा अन्य जिन प्रकल्पों के निर्माण की योजना बनाई है, उसमें यज्ञशाला, जन्मभूमि संग्रहालय, सत्संग भवन सभागार, अध्ययन-अनुसंधान क्षेत्र, रामलीला केंद्र, प्रोजेक्शन थिएटर, प्रदर्शनी कक्ष, बहुआयामी चलचित्रशाला, आदर्श गौशाला, सीता रसोई अन्नक्षेत्र, पार्किंग, अमानती कक्ष, आपातकालीन चिकित्सा सहायता केंद्र सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जानी है।
इसको लेकर रामजन्मभूमि परिसर के विस्तारीकरण के लिए सर्वे का कार्य भी शुरू हो चुका है। नजूल की जमीनों को चिह्नित किया जा रहा है। ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा के पास गुरुवार को भी नजूल की जमीनों पर से अवैध अतिक्रमण हटाया गया है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र कहते हैं कि परिसर के विस्तारीकरण की कवायद शुरू हो चुकी है। रामजन्मभूमि परिसर से सटे मंदिरों, घरों और खुली जमीन के मालिकों से बाकी जगह खरीदने के लिए वार्ता की जा रही है।
राममंदिर के लिए नया रास्ता बनाने की तैयारी है। अयोध्या-फैजाबाद मुख्य मार्ग स्थित बिड़ला धर्मशाला के सामने से सुग्रीव किला होते हुए रामजन्मभूमि तक 30 मीटर का एक नया मार्ग प्रस्तावित है। इसके लिए जमीन चिह्नित की जा चुकी है। यहीं स्थित रामगुलेला के पास रामकोट चौराहा का भी निर्माण किया जाना है। वहीं शृंगारहाट से रामजन्मभूमि परिसर तक भी 850 मीटर सड़क का चौड़ीकरण 13 मीटर में प्रस्तावित है। इसको लेकर भी कवायद शुरू हो चुकी है। इस सड़क के चौड़ीकरण होते ही रामकोट स्थित सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के आसपास का भी परिदृश्य बदल जाएगा। यही नहीं रामजन्मभूमि परिसर सहित उसके आसपास पांच पार्किंग वह अन्य जनसुविधाएं विकसित करने के लिए जमीन लेने की तैयारी हो रही है।
रामनगरी का रामकोट मोहल्ला पौराणिक एवं ऐतिहासिक मान्यताओं को समेटे है। अयोध्या पर शोध करने वाले डॉ. हरिप्रसाद दुबे बताते हैं कि अयोध्या की जो विशेषता है वह रामजन्मभूमि के कारण है। रामजन्मभूमि की रक्षा के लिए चारों तरफ कोट (दुर्ग) बनाए गए थे। कोटेश्वर महादेव, मतगजेंद्र, क्षीरेश्वरनाथ सहित धनयक्ष कुंड स्थापित किए गए। इसी कारण रामजन्मभूमि के चारों ओर के क्षेत्र को रामकोट कहा गया। रामकोट साधकों की भूमि रही है। बड़े-बड़े साधकों ने यहां तप, तपस्या और साधना की। इसी रज पर भगवान राम का बचपन बीता है। ऐसी मान्यता हैं कि रामकोट में अदृश्य रूप में शक्तियां विराजती हैं। इसी मान्यता के चलते रामकोट की परिक्रमा भी की जाती है।