अयोध्या। श्रीराम विवाह के अवसर पर संस्कृति विभाग से आयोजित 39वें रामायण मेला के तृतीय दिवस की सांस्कृतिक संध्या में गोरखपुर के ख्याति प्राप्त कलाकार पीयूष राज एवं उनके दल से प्रस्तुत राम विवाह का मंचन अपनी अमिट छाप श्रद्धालु-दर्शकों पर छोड़ गया। धनुष यज्ञ में राजाओं के असफल शौर्य प्रदर्शन से निराश राजा जनक के प्रस्तुत उद्गार पर लक्ष्मण का आक्रोश, धनुष भंग के पश्चात जयमाल प्रसंग व परशुराम-लक्ष्मण संवाद की प्रस्तुति ने सभी को रोमांचित कर दिया। विवाह प्रसंग में अयोध्या से बारात के आगमन पर जनकपुर वासियों में छाया खुशी का प्रर्दशन भाटों के द्वारा अवध नगरिया से अवली बरतिया सुन मोर सजनी.. गीत के साथ अभिनय पूर्ण नृत्य के प्रदर्शन ने सभी को आनंद विभोर कर दिया।
विवाह के बाद विदाई प्रसंग की करुण वेदना की प्रस्तुति ने सभी की आँखों को नम कर दिया। भजन गायक पंडित रामदेव शर्मा, मुजफ्फरनगर ने अपनी सहयोगी गायिका वैदेही शर्मा के साथ संयुक्त स्वर में शिव स्तुति डिमिक-डिमिक डमरू बाजे... की प्रस्तुति से रामायण मेला के मंच पर भक्तिभाव की अविरल धारा प्रवाहित की। राम के प्रति हनुमान भक्ति का भावगीत जिनके मन में सदा विराजैं राम लखन और जानकी, जय बोलो हनुमान की..प्रस्तुति प्रभावशाली रही।
संध्या की अंतिम प्रस्तुति में शीतला प्रसाद वर्मा एवं उनके दल द्वारा रामायण मेला के मंच पर फरुवाही नृत्य की रोमांचक प्रस्तुति सराहनीय रही। शंख ध्वनि के साथ देव स्तुति के संवेद स्वर से अपने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए देवी शीतला मइया के पचरा गीत पर पात्रों के अभिनय ने मंच पर समा बाँध दिया। घुंघरूओं से गुथे रंग-बिरंगे कपड़े, पटका, बनियान, धोती, गमछा व लाठी के पोशाक से सजे कलाकारों का आकर्षक कलाबाजी प्रदर्शन लोक संस्कृति की अद्भुत झांकी के रूप में प्रशंसनीय रहा।
इससे पूर्व सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के राज्यमंत्री विजय कुमार कश्यप एवं विशिष्ट अतिथि राजा अयोध्या विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र द्वारा किया गया। संस्कृति विभाग के कार्यक्रम अधिशासी एवं रामायण मेला के नोडल अधिकारी कमलेश कुमार पाठक व अयोध्या शोध संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी रामतीरथ द्वारा मंत्री सहित अन्य अतिथियों का सम्मान किया गया।