अयोध्या। राम विवाह के अवसर पर पावन सलिला सरयू के तट पर संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित 39वें रामायण मेला के द्वितीय दिवस की सांस्कृतिक संध्या में गोरखपुर के ख्याति प्राप्त लोकगायक राकेश श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत गीत आजु जनकपुर में मड़वा सुहावन लागे... से दर्शकों में त्रेतायुगीन रामविवाह की अलौकिक झांकी की अनुभूति स्वाभाविक हो गई। एक तरफ अयोध्या की गलियों में रामविवाह की धूम दूसरी तरफ रामकथा पार्क के रामायण मेला के मंच पर प्रस्तुत विवाह गीतों की रोमांचक प्रस्तुति देख दर्शक अभिभूत होते रहे।
इसके पूर्व आयोजन के प्रथम सत्र में नरेंद्र कुमार तिवारी, श्रीराम आदर्श रामलीला मंडल, बस्ती द्वारा धनुष यज्ञ प्रसंग का मंचन किया गया। द्वितीय दिवस की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि अयोध्या परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक व जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार द्वारा द्वीप प्रज्वलन कर किया गया। भजन सम्राट एवं अवध रत्न से सम्मानित प्रतापगढ़ से पधारे देवेंद्र पाठक द्वारा प्रस्तुत भजन गीतों सीताराम जी की प्यारी रजधानी लागे, मोहे मीठो-मीठो सरयू जी को पानी लागे... मधुर-मधुर नाम सीताराम-सीताराम...की प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।नृत्यों को मिलाकर प्रस्तुत शास्त्रीय अभिनय पर आधारित नृत्य नाटिका अन्यन्त ही सराहनीय रही।
अभिनय पूर्ण शास्त्रीय नृत्य में रामभक्ति, शिव की स्तुति, माँ शक्ति का संहार रूप, भगीरथ द्वारा गंगा अवतरण व हनुमान चालीसा पर आधारित भाव नृत्य की प्रस्तुति ने सभी को प्रभावित किया। दल के मुख्य पात्रों में विशाल कृष्णा,रूपाली, वागची, राहुल मुखर्जी, श्रेयसी, मुंशी, विशाल राय चौधरी, हिमांगी व संचिता ने प्रभावित किया। लोकगायिका प्रतिमा यादव व उनके दल ने रामविवाह की अविरल झांकी को मंच पर अपनी प्रस्तुतियों से साकार कर दिया। संस्कृति विभाग के रजिस्ट्रीकरण अधिकारी डॉ. लवकुश द्विवेदी, रामायण मेला के नोडल अधिकारी कमलेश कुमार पाठक, अयोध्या शोध संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी रामतीरथ व रामायण मेला समिति के पदाधिकारियों द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। संचालन आकाशवाणी के उद्घोषक डॉ.देशदीपक मिश्र ने किया।
श्रीसीताराम विवाह रसिकों का प्राण प्रसंग है।
अयोध्या। रामायण मेले के प्रथम सत्र में आयोजित प्रवचन संत में ज.गु.रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि श्रीसीताराम विवाह रसिकों का प्राण प्रसंग है। विवाह केवल स्त्री और पुरुष के गृहस्थ जीवन में प्रवेश का ही प्रसंग नहीं है बल्कि यह जीवन को संपूर्णता देने का अवसर है। श्रीराम के विवाह के जरिए हम विवाह की महत्ता और उसके गहन अर्थों से परिचित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अहंकार के प्रतीक धनुष को तोड़ा, यह इस बात का प्रतीक है कि जब दो लोग एक बंधन में बंधते हैं तो सबसे पहले उन्हें अहंकार को तोड़ना चाहिए। प्रवचन सत्र को महंत जन्मेजय शरण, आचार्य नरेश मिश्र सहित अन्य संतों ने भी संबोधित किया। संचालन कमलेश सिंह ने किया।