अयोध्या। श्रीसीताराम विवाह महोत्सव के अवसर पर अवध नगरी वर पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए भी जनकपुरवासियों के ही रंग में रंगी नजर आई और दास परंपरा के अनुगामी संत भी सखी परंपरा में ही पगे दिखाई दिए। अवसर था रामनगरी के मंदिरों में कुंवर कलेवा महोत्सव का। छयलवा को दैहो चुनि-चुनि गारी, छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन, आनी धरी मणि थारी...लुटि न जावें नगर को सिगरी कन्या कुमारी, जेवत लालन मृदु मुसुकावत, सिया अली बलिहारी...मधुुर गालियों की यह बौछार किसी और को नहीं बल्कि, अपने ही उपास्य को वह रसिकोपासक संत-साधक दे रहे ते जो प्रतिदिन उन्हें ही भजते हैं।
वहीं, मानसकार गोस्वामी तुलसीदास की भावना के अनुरूप ही संत-महंत भी पुनि जेवनार भई बहु भांति, पठए जनक बोलाए बराती...का अनुसरण करते हुए युगल सरकार को विविध व्यंजनों का रसास्वादन कराने में पीछे नहीं रहे। दशरथ महल बड़ास्थान में महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में विवाहोत्सव का शिखर बयां हुआ। महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य ने राम सीता सहित चारों भाईयों के स्वरूपों की पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिर की परंपरा से जुड़े संगीत साधकों द्वारा प्रस्तुत मंगल गीतों की गूंज रही, भक्त आहलादित होकर नृत्य करते रहे। लक्ष्मण किला में रात भर विवाहोत्सव का दौर चला, आचार्य प्रणीत पदों के गायन से उत्सव का उल्लास शिखर पर रहा। अपने आराध्य के भव्य मंदिर का निर्माण शुरू होने की खुशी उत्सव में स्पष्ट प्रत्यक्षदर्शित हो रही थी।
महंत मैथिलीरमण शरण व महंत मिथिलेशनंदनी शरण अपने आराध्य के विवाह उत्सव में मगन नजर आए। श्रीरामबल्लभाकुंज में महतं रामशंकर दास वेदांती व अधिकारी राजकुमार दास के निर्देशन में भगवान के स्वरूपों की प्रतिष्ठा कर उन्हें विविध व्यंजनों का रसास्वादन कराया गया। इस दौरान मंदिर परंपरा के शास्त्रीय गायकों ने सखियों के रूप में अपने ही उपास्य को गारियों से नवाजते हुए रिझाया। इस दौरान कथावाचक प्रेमभूषण महाराज, महंत शशिकांत दास, महंत गिरीश दास सहित अन्य मौजूद रहे। वहीं विवाह उपासना की प्रधान पीठ विअहुति भवन में भी कलेवा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। महंत वैकुंठ शरण के सानिध्य में भगवान के स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर आरती उतारी गयी। इसके बाद छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। इसी तरह रामहर्षण कुंज, दिव्यकला कुंज सहित अन्य मंदिरों में भी राम कलेवा का उत्सव पूरी भव्यता के साथ मनाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तों ने कलेवा महोत्सव में शामिल होकर अपना जीवन धन्य किया।
रंगमहल में रही विवाहोत्सव की धूम
प्राचीन पीठ रंगमहल मंदिर में अगहन शुक्ल पंचमी पर भगवान राम सीता सहित चारों भाईयों का विवाह महंत रामशरण दास के सानिध्य में विधिविधान पूर्वक संपन्न हुआ। यहां दो सौ वर्ष पुराने भव्य काष्ठ के मंडप में मंदिर में विराजमान चारों भाईयों सहित माता किशोरी के विग्रह को काष्ठ मंडप में स्थापित कर विवाह की रस्म निभाई गयी। रात भर विवाह का दौर चला सुबह चार बजे राम कलेवा का आयोजन किया गया। भगवान के स्वरूपों को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय आदि ने भी भगवान के स्वरूपों का पूजन किया। कई न्यायिक हस्तियों ने भी उत्सव में सहभागिता निभाई।