अयोध्या। जिले में संस्थागत प्रसव के आंकड़े में पिछले साल की अपेक्षा भारी गिरावट आंकी गयी है। सरकारी अस्पतालों में इस साल दो हजार से ज्यादा की संख्या में डिलीवरी कम हुई है। ऐसा कोरोना संक्रमण के चलते होना माना जा रहा है। लॉकडाउन और यातायात की सुविधा नदारद रहने के कारण गर्भवती महिलाएं अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाईं। इसका परिणाम रहा कि किसी तरह होम डिलीवरी करानी पड़ी।
जिले के 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 246 स्वास्थ्य उपकेंद्र सहित जिला महिला अस्पताल, तुलसी महिला अस्पताल, छह अरबन स्वास्थ्य केंद्र व राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में संस्थागत प्रसव की सुविधा है। गांवों में तैनात आशा बहू व एएनएम को गर्भवती महिलाओं से संपर्क करके उनके नियमित टीकाकरण, समय-समय पर आवश्यक जांचें कराते हुए उनका प्रसव संबंधित स्वास्थ्य इकाई पर कराने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए उन्हें पारिश्रमिक भी दिया जाता है।
संसाधनों व जागरुकता के अभाव में होम डिलीवरी का चलन ग्रामीणांचल में अधिक देखा जाता रहा है। घर पर प्रसव में संक्रमण व स्थिति गंभीर होने पर होने वाले नुकसान को देखते हुए संस्थागत प्रसव के लिए जोर दिया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आशा बहू व एएनएम की तैनाती करके गर्भवती महिलाओं के संस्थागत प्रसव की जिम्मेदारी सौंपी गई। विगत वर्षों में तो होम डिलीवरी के मामले बहुत कम आते रहे हैं, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण से जिले में होम डिलीवरी को भी पंख लग गया।
इसका अंदाजा स्वास्थ्य विभाग के प्रसव के आंकड़ों से स्वत: लगाया जा सकता है। मार्च माह से लॉकडाउन होने के कारण एंबुलेंस ही एकमात्र साधन बचा। यातायात व्यवस्था नदारद होने के कारण आकस्मिक जरूरत होने पर लोग अस्पताल तक पहुंच ही नहीं सके। वहीं, कोरोना प्रोटोकॉल के तहत इलाज के मानकों व व्यवस्थाओं की जटिलता का अनुमान लगाते हुए भी लोग अस्पताल आने से कतराते रहे। जिसका नतीजा रहा कि गतवर्ष के अक्तूबर माह तक हुए प्रसव के सापेक्ष इस बार 2103 संस्थागत प्रसव कम हुए हैं। जिसे बढ़ाने के लिए अधिकारियों ने मातहतों के पेंच कसना शुरू किया है।
सीजेरियन के बजाय अधिक हुए सामान्य प्रसव
माना जाता है कि अस्पतालों में पहुंचने पर जोखिम से बचने के लिए व निजी अस्पतालों में मोटी कमाई के लिए अधिकांशतया सीजेरियन प्रसव पर जोर दिया जाता है। इस बार व्यवस्थाएं न होने से सामान्य प्रसव के लिए भी उम्मीद की किरण आमजन में जगी है। बस, विशेषज्ञों की राय में होम डिलीवरी से संक्रमण का खतरा अधिक माना जाता है।
इनसेट..
सरकारी अस्पतालों में प्रसव के आंकड़े पर एक नजर..
-अस्पताल/गतवर्ष अक्तूबर तक प्रसव/वर्तमान वर्ष में प्रसव/कमी
जिला महिला अस्पताल/2568/2235/-333
अमानीगंज/1310/986/-324
मसौधा/873/610/-263
रुदौली/2024/1804/-220
बीकापुर/1559/1445/-114
पूराबाजार/1349/1132/-217
मवई/1545/1404/-141
मया बाजार/1264/1122/-142
हैरिंग्टनगंज/894/741/-153
तुलसी महिला अस्पताल/82/1/-81
मेडिकल कॉलेज/103/28/-75
कोरोना संक्रमण के दौरान संसाधनों के अभाव में इस बार संस्थागत प्रसव कम हुए हैं। इसे बढ़ाने के लिए सभी स्वास्थ्य इकाइयों को निर्देशित किया गया है। एएनएम व आशा बहुओं की निगरानी भी जिला स्तर से की जा रही है।
- डॉ. घनश्याम सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी, अयोध्या