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धान खरीद में बिचौलिए हावी, भटक रहे किसान

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भेलसर। सरकारी सिस्टम तोड़ने के लिए बिचौलियों द्वारा छोटे किसानों से सस्ता धान खरीदकर क्रय केंद्रों पर बेचने की कालाबाजारी का खेल जा रहा है। बिचौलियों के रैकेट में फंसे किसान रोज ही क्रय केंद्रों का चक्कर काट रहे हैै,ं कहीं ताला लटक रहा तो कहीं सन्नाटा पसरा है। केंद्र प्रभारी भी नदारद रहते हैं, लेकिन कागजी फाइलों में किसानों का धान धड़ल्ले से खरीदा जा रहा है।
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सरकार ने किसानों का धान खरीदने के लिए रुदौली तहसील क्षेत्र में 8 राजकीय धान क्रय केंद्र खोले हैं। यह क्रय केंद्र कब खुलते हैं और कब बंद होते हैं, इसका किसानों को पता ही नहीं चलता। इसके चलते किसान विवश होकर अपना धान बिचौलिए के हाथ औने-पौने दाम में बेचने पर मजबूर हैं। कुछ बड़े किसान थक हारकर सबसे ज्यादा खरीद करने वाले विपणन शाखा की धान क्रय केंद्र रुदौली पर ही पहुंच रहे हैं, जिससे यहां हालात बिगड़ते जा रहे हैं। तौल के लिए किसानों को एक-एक सप्ताह खुले आसमान व ट्राली के नीचे रात गुजारनी पड़ रही है।
ग्राम कसारी के बड़े काश्तकार जयकुमार मिश्रा बताते हैं कि क्रय केंद्र लोहटी पर धान लेकर गया था। वहां कर्मियों ने नमूना जांच के लिए एक राइस मिलर के यहां भेजा, जहां से वापस आते ही धान को रिजेक्ट कर दिया। एक पखवाड़े से धान की तौल कराने के लिए क्रय केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं। केंद्रों पर बिचौलिए हावी हैं, जहां किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है। रुदौली तहसील क्षेत्र में खाद्य विभाग के विपणन शाखा के रुदौली व पटरंगा, पीसीएफ के गनेशपुर, ऐहार, बरौली, नेफेड के लोहटी, लालुवापुर व एफपीओ का लालुवापुर में धान क्रय केंद्र खोले गए है। जहां धान बेचने के लिए किसानों को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं।
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धान की खरीद न के बराबर, फिर भी लक्ष्य की ओर बढ़ रहे
एफपीओ द्वारा लालुवापुर में खोले गए राजकीय क्रय केंद्र पर मिले फिरोजपुर मखदूमी गांव के निवासी राजबख्श सिंह ने बताया कि यहां केंद्र प्रभारी नदारद हैं। धान की तौल कराने के लिए केंद्रों का चक्कर काट रहा हूं। तौल की गति सुस्त होने का मतलब बिचौलिए से ज्यादा धान खरीदा जा सके। केंद्र पर धान की खरीद न के बराबर है लेकिन लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
मानकों के फेर में फंसे किसान बिचौलियों के बेच रहे धान
हरिहरपुर गांव के निवासी अभिषेक कुमार बताते है कि नेफेड द्वारा खोले गए राजकीय क्रय केंद्र लालुवापुर में ताला लटक रहा है। विवश होकर रुदौली केंद्र पर तौल के लिए धान लाए हुए एक सप्ताह हो गया आज तौल होने जा रही है। कहा कि मानकों के फेर में फंसे किसान मजबूर होकर बिचौलिए के हाथ 12 से 13 सौ रुपये/क्विंटल में धान बेच रहे हैं। जबकि सरकारी मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विंटल है।
कागज में रोज खरीदा जा रहा धान
जलालपुर गांव के किसान धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि सबसे अधिक खरीद रुदौली क्रयकेंद्र पर हो रही है। यही कारण है कि यहां ट्रालियों की लाइन लगी रहती है। पांच दिन से लाइन में लगा हूं। अधिकांश क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता है। जबकि कागजी फाइल में रोज खरीद हो रही है। इसमें अधिकारी व कर्मचारियों से लेकर राइस मिलर्स के संचालक तक की मिलीभगत की बू आ रही है।
किसान परेशान है, बिचौलिए कर रहे मौज
सल्लाहपुर गांव के किसान शेषकुमार कहते हैं कि किसान परेशान है और बिचौलिये मौज कर रहे हैैं। मजबूरी में बिचौलियों, आढ़तियों और राइस मिलर्स को किसान औने पौने दाम में धान बेच रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकारी खरीद का लक्ष्य बिचौलिये पूरा कराएंगे।
सभी राजकीय धान क्रय केंद्रों की जांच की जाएगी। केंद्र प्रभारियों की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी। सरकार की मंशा है कि क्रय केंद्र पर किसानों से ही धान खरीदा जाए।
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- विपिन कुमार सिंह, एसडीएम रुदौली
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