अयोध्या। मंडल कारागार में निरुद्ध महिला बंदियों द्वारा बनाई गई अगरबत्ती से अयोध्या समेत अन्य शहरों के मठ मंदिर व घर महकेंगे। इसके लिए वह अयोध्या के मठ मंदिरों में प्रतिदिन देव अर्पित हजारों किग्रा फूल से अगरबत्ती बनाएंगी। इसके लिए इन महिला बंदियों को बाकायदा प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण केंद्रीय औषधि एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर) लखनऊ के वैज्ञानिकों द्वारा दिया जा रहा है। इसमें राज्य विधिक प्राधिकरण द्वारा भी सहयोग किया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाना है। रविवार को कारागार परिसर में आयोजित एक समारोह में इसका शुभारंभ किया गया।
अयोध्या के मठ मंदिरों में प्रति देव अर्पित हजारों किग्रा फूलों से मंडल कारागार में निरुद्ध महिला बंदियों द्वारा अगरबत्ती बनाया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय औषधि एवं सगंध पौधा संस्थान लखनऊ द्वारा महिला बंदियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। अयोध्या के मठ मंदिरों में चढ़े इन फूलों को इन्हीं के द्वारा उपलब्ध भी कराया जाएगा, सीएसआईआर ने इसकी जिम्मेदारी एक एनजीओ को सौंपी है। रविवार को मंडल कारागार में आयोजित एक समारोह में इसकी शुरूआत की गई।
मुख्य अतिथि के रूप में सीएसआईआर नई दिल्ली के महाप्रबंधक डॉ. शेखर चि. मांडे मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि इसके लिए वेस्टेज फूलों से सुगंधित अगरबत्ती बनाने की एक नई तकनीकि का इस्तेमाल किया जा रहा है। बताया कि इसका उद्देश्य महिला बंदियों का आत्मनिर्भर बनाना है, वह इस विधि से अगरबत्ती बनाना सीखकर जेल से रिहा होने के बाद रोजगार कर सकती है। इस दौरान उन्होंने सीएसआईआर की कार्य प्रणाली के बारे में भी जानकारी दी। जेल अधीक्षक बृजेश कुमार ने बताया कि अयोध्या से वेस्टेज फूलों को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी एक एनजीओ को सौंपी गई है।
इस समारोह में सीएसआईआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरके श्रीवास्तव, सीएसआईआर-एनबीआरआई लखनऊ के निदेशक प्रो. सरोज के बारिक, सीएसआईआर लखनऊ के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी, उ.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के विशेष कार्यकारी अधिकारी भागीरथ वर्मा, डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी, सीजेएम अयोध्या डॉ. सुनील सिंह, न्याययिक अधिकारी अभिनव तिवारी मौजूद रहे।