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कोरोना की दूसरी वेब रोकने के जिम्मेदार ही हुए बेफिक्र

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अयोध्या। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के लिए सरकार स्तर से रोजाना कड़े दिशा निर्देश आ रहे हैं, मगर जमीनी हकीकत इससे जुदा है। इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कोरोना वारियर्स ही संक्रमण के प्रति लापरवाह नजर आ रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मी खुद मास्क, ग्लब्स, सैनिटाइजर व अन्य आवश्यक उपायों को दरकिनार कर खतरे से बेफिक्र होकर ड्यूटी दे रहे हैं। ऐसे में दूसरी लहर का प्रसार बढ़ा तो निपटना आसान नहीं होगा।
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अमर उजाला ने मंगलवार को जिला अस्पताल में व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो तैयारियों की कलई खुलती नजर आई। यह हाल तब था जब यहां चौदहकोसी-पंचकोसी परिक्रमा मेला के साथ पूर्णिमा स्नान को एक सप्ताह तक रेला लगा हुआ है। हाल यह है कि चरम पर पहुंचने के बाद इन दिनों कोरोना संक्रमण की रफ्तार जिले में थम गई है। लेकिन दूसरी लहर से बेहाल दिल्ली समेत कई मेट्रो शहरों में हालत खराब होने से यहां भी खतरे से निपटने के लिए सरकार की ओर से सावधानियों को अपनाने में बगैर कोई ढिलाई किए तैयारियों का निर्देश दिया गया है। मगर, हाल यह है कि संक्रमण से लड़ने का जिम्मा जिनके कंधों पर है, वे योद्धा ही बेफिक्र नजर आ रहे हैं।
मंगलवार को जिला अस्पताल में मरीजों की स्क्रीनिंग, सैनिटाइजेशन आदि कार्य ठप मिले। वार्डों में बिना मास्क के मरीज व तीमारदार भटकते आते-जाते रहे। सामाजिक दूरी का फार्मूला भी कहीं असर करता नहीं दिखा। खास बात यह रही कि अधिकांश स्वास्थ्यकर्मी बगैर मास्क के दिखे, जो लगाए थे उनका मास्क भी मुंह से नीचे खिसका मिला। इसी तरह हर पटल पर लोग कोरोना मानकों की धज्जियां उड़ाते नजर आए। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि कोरोना की दूसरी लहर आई तो हालात कैसे नियंत्रण में होंगे।
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सीन एक : अस्पताल पहुंचने वालों की स्क्रीनिंग ठप
जिला अस्पताल में पहुंचने पर प्रत्येक मरीज व पर्चा काउंटर के निकट स्क्रीनिंग काउंटर खोला गया है। यहां पर एक व्यक्ति की तैनाती है, जिसका कार्य मरीजों का विवरण लिखने, थर्मल स्कैनिंग आदि कराकर ही अंदर भेजने का है। लेकिन करीब 11:20 बजे यहां एक कर्मचारी बिना मास्क के बैठा रहा, लेकिन स्क्रीनिंग नहीं हो रही थी। जबकि कुछ मरीज ओपीडी पर्चा कटवाते नजर आए।
सीन दो : फ्लू डेस्क में भी चिकित्सक भी बिना मास्क
पर्चा काउंटर के बगल फ्लू डेस्क खोली गई है, जहां कोरोना काल में सर्दी, जुकाम, बुखार के मरीजों के इलाज के एक चिकित्सक की तैनाती है। मंगलवार को चिकित्सक तो बैठे मिले, लेकिन बिना मॉस्क के दिखे।
सीन तीन : इमरजेंसी ओपीडी में फार्मासिस्ट व मरीज बगैर मास्क
यह सीन इमरजेंसी ओपीडी की पूर्वाह्न करीब 11:22 बजे की है। यहां पर चिकित्सक तो मास्क लगाए बैठे रहे, लेकिन फार्मासिस्ट व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के मुंह पर मास्क नहीं दिखा, न ही किसी ने ग्लब्स पहना था।
सीन चार : बिना स्कैनिंग व सैनिटाइजेशन के इमरजेंसी में घुस रहे लोग
कोरोना काल में नियम बनाया गया कि एक-एक करके लोग इमरजेंसी ओपीडी में घुसेंगे और प्रवेश द्वार पर उन्हें सैनिटाइज व थर्मल स्कैन किया जाएगा, लेकिन मंगलवार को लोग बेरोकटोक घुसते रहे। न तो सैनिटाइजेशन की कोई इंतजाम था ना ही कोई कर्मी उन्हें रोकने वाला दिखा।
सीन पांच : वार्डों में बिना मास्क के दिखे मरीज व तीमारदार
बिना मॉस्क के किसी भी मरीज व तीमारदार को वार्डों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। लेकिन इमरजेंसी वार्ड में करीब 11:30 बजे अधिकांश मरीज व तीमारदार बिना मास्क के ही भर्ती मिले।
सीन छह : दवा काउंटर पर भी बिना मास्क के कर्मचारी
ओपीडी क्षेत्र के दवा वितरण कक्ष में इंटर्नशिप करने वाले कुछ लोग व अस्पताल के फार्मासिस्ट सहित अन्य कर्मचारी बगैर मास्क के ही कार्य करते नजर आए। जबकि डॉक्टरों से परामर्श लेने के बाद दवाएं लेने के लिए मरीजों की आमद यहीं पर सर्वाधिक होती है।
सीन सात : बिना मास्क के एआरवी कक्ष में फार्मासिस्ट
ओपीडी के तीन नंबर काउंटर पर फार्मासिस्ट मरीज को एआरवी का इंजेक्शन लगाया जाता है। मंगलवार को भी मरीज व तीमारदारों की एआरवी के लिए भीड़ रही, लेकिन इंजेक्शन लगाने वाले फार्मासिस्ट के मुंह पर यहां भी मास्क नहीं दिखा।
स्क्रीनिंग कक्ष में बैठा व्यक्ति कुछ समय के लिए कार्यवश गया था। थर्मल स्कैनिंग व मास्क के साथ ही लोगों को अंदर प्रवेश दिया जा रहा है। यदि कर्मचारी कोरोना संक्रमण के प्रति लापरवाही बरत रहे हैं तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. रवींद्र कुमार, प्रमुख अधीक्षक, जिला चिकित्सालय अयोध्या
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