फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भूमि अधिग्रहण के लिए तीन गांवों के किसानों को मनाने में जुटे अधिकारी

विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। आवास विकास परिषद की ओर से प्रस्तावित भूमि विकास, गृहस्थान एवं बाजार योजना के लिए तीन गावों शाहनेवाजपुर मांझा, तिहुरा मांझा व मांझा बरहटा के किसानों की करीब 1150 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जानी है। तीनों गांवों के किसानों को भूमि अधिग्रहण के लिए मनाने में आवास विकास परिषद के अधिकारी जुटे हैं। इसके लिए अधिकारियों ने गुरुवार को तीसरी बार किसानों के साथ बैठक की। बैठक में किसानों ने 2013 के अधिनियम के तहत भूमि अधिग्रहण करने की मांग उठाई है।
विज्ञापन

गुरुवार को तीन गांवों के किसानों के साथ आवास विकास परिषद के मुख्य अभियंता केसी श्रीवास्तव व सहायक अभियंता ओपी पांडेय ने बैठक कर उन्हें भूमि अधिग्रहण के लिए मनाने की एक और कोशिश की। किसान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष श्याम जी दूबे ने बताया कि अधिकारियों को पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया है। जिसके तहत ग्राम शाहनेवाजपुर मांझा व ग्राम तिहुरा मांझा का एक समान मुआवजा सुनिश्चित कर प्रदान करने, अधिग्रहण कानून 2013 ई के तहत ही भूमि को अधिग्रहीत कर सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ किसानों की भूमि का 30 प्रतिशत अंश भी विकसित कर वापस करने की मांग की गई है।
मांगपत्र में मुआवजा स्पष्ट किया करने व देने का समय निर्धारित करने की भी मांग उठाई गई है। कहा कि हमारी यह भी मांग है कि जो 1150 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जानी है, उसका आधा हिस्सा करीब 550 एकड़ ही अधिग्रहीत कर बाकी किसानों के लिए छोड़ दिया जाए। बैठक में शामिल परिषद के सहायक अभियंता ओपी पांडेय ने बताया कि किसानों को भूमि अधिग्रहण के लिए मनाने का प्रयास किया जा रहा है, उनकी जो उचित मांगें हैं उनका जरूर पूरा किया जाएगा। बैठक में किसान शिवपूजन यादव, प्रधान अजय यादव, राजदेव यादव, अशोक यादव, मधुर दुबे, रामसुरेमन यादव, ब्रह्मदेव मिश्र, रज्जू सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन

क्या कहता है कानून और विधेयक
भूमि अधिग्रहण कानून-2013 पांच महत्वपूर्ण स्तंभों पर टिका है। ये स्तंभ हैं सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए), लोगों की सहमति, मुआवजा, पुनर्वास व पुनर्स्थापन। यह कानून सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए निजी जमीन लेने की सरकारी शक्तियों को सीमित करता है।
वहीं, अनावश्यक सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए सरकार द्वारा भेदभावपूर्ण अधिग्रहण भी रोकता है। कानून पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित 70 प्रतिशत लोगों की स्वीकृति अनिवार्य बनाकर लोगों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करता है।
प्राइवेट परियोजनाओं के लिए 80 प्रतिशत लोगों की स्वीकृति जरूरी है। कानून के अनुसार, ग्रामीण भूमि का मुआवजा बाजार मूल्य का चार गुणा होगा, जबकि शहरी भूमि के लिए बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा मिलेगा। रोजगार गंवाने और जमीन देने वाले लोगों का पुनर्वास और पुनर्स्थापन भी अनिवार्य है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें