अयोध्या। अतीत के प्रसंग और वर्तमान की लोककला से सजी झांकियों ने प्राचीनतम से नूतन तक की यात्रा कराई। श्रद्धालुओं के जेहन में त्रेता में घटित घटनाएं तैर रहीं थीं तो आंखें वर्तमान की कलात्मकता से आनंदित हो रहीं थीं। साकेत महाविद्यालय से दीपोत्सव को लेकर निकाली गईं ये झांकियां कुछ ऐसा ही अहसास करतीं अपने गंतव्य तक पहुंचीं। देखने वाले प्रसंग के साथ कलाकारों की कला को प्रणाम करते रहे।
भगवान राम के जीवन प्रसंगों से जुड़ी झांकियों को देखने के लिए अयोध्यावासियों को सुबह से इंतजार था।
साकेत महाविद्यालय से शोभायात्रा की शुरुआत होते ही लोग सड़कों पर उतर आए। हर कोई भगवान राम के जीवन के अलग-अलग प्रसंगों को देखकर त्रेतायुग की कल्पना करने लगा। राम कथा पार्क तक तीन किलोमीटर का शोभायात्रा मार्ग ऊर्जा, उमंग और उल्लास से भरा रहा। देखने वालों में जोश इस कदर रहा कि झांकियों के साथ चल रही कलाकारों की टोली गदगद हो गई।
शोभायात्रा की अगुवाई प्रयागराज से आए कलाकारों के दल सरस्वती, स्वर, संगम ने की। शोभायात्रा की पहली झांकी पुत्रेष्टि यज्ञ पर आधारित रहीं। इसके आगे चल रहे कलाकारों के दल बधाई गीत ‘बाजे लगी अनंत बधइया, अयोध्या में गूंजे बधइया’ और नृत्य के जरिये छटा बिखेर रहे थे। यात्रा जैसे-जैसे अपने पड़ाव की ओर बढ़ रही थी कलाकारों और सड़क किनारे छतों पर खड़े लोगों का उत्साह भी बढ़ता गया। शोभायात्रा में मथुरा, वृंदावन, प्रयाग राज, महोबा, पीलीभीत से आए लोक कलाकारों ने योगदान दिया।
इन प्रसंगों पर आधारित रहीं झांकियां
पुत्रेष्टि यज्ञ, गुरुकुल शिक्षा, राम-सीता विवाह, अहिल्या उद्धार, पंचवटी, केवट प्रसंग, रामेश्वरम सेतु, लंका दहन के प्रसंगों से जुड़ी झांकियां शामिल रहीं। इन 11 झांकियों को 20 टीमों ने साकार किया।
बोले कलाकार : हम राम का आशीर्वाद लेकर जाएंगे
लोक नृत्य कलाओं को प्रस्तुत कर रहे कलाकारों के लिए दीपोत्सव में शामिल होना खास रहा। मथुरा-वृंदावन से आए 15 कलाकारों के दल के खजान सिंह का कहना है कि वह भगवान कृष्ण की भूमि से रामलला के दरबार में आए हैं। यह बहुत ही सौभाग्य की बात है। यहां से रामलला का आशीर्वाद लेकर जाएंगे। प्रयागराज से कलाकारों के दल के साथ आई बीना सिंह का कहना है कि प्रभु राम के कार्यों का हिस्सा बनना अपने आप में खास हैं। उनके 15 महिला और बच्चियों की टोली को झांकियों की अगुवाई करने का मौका मिला है।
चरकुल आर्ट एकेडमी गोवर्धन, मथुरा के कलाकारों में से एक लखन चंद्र ने बताया दीपोत्सव के कार्यक्रम में हिस्सा लेने हर बार उनकी टोली को बुलाया जाता है। हर बार वह दोगुने उत्साह के साथ अपनी टीम के साथ आते हैं। राम की भूमि पर आने से उनके मन में गजब की ऊर्जा का संचार हो जाता है। मसकबीन बाजा बजा रहे कौशांबी से आए कलाकार धर्मेंद्र कुमार का कहना है कि उनको बीन की धुन के जरिए भगवान राम की सेवा का मौका मिला है। इस आयोजन के लिए वह पूरी टीम के साथ कई दिनों से तैयारी कर रहे थे।
आज अपनी कला को अयोध्यावासियों के सामने प्रदर्शित करने का मौका मिला है। अयोध्या के स्थानीय कलाकर विजय यादव फरुआही प्रस्तुत कर रहे थे उन्होंने बताया कि यहीं का होने के कारण उन्हें और उनकी टीम को हर बार मौका मिलता है। इससे स्थानीय स्तर पर तो पहचान बनती ही है साथ ही बाहर से आए कलाकारों से मिलने और सीखने का मौका मिलता है।
शिक्षिका और अधिवक्ता भी हैं लोक कलाकार
राम के जीवन से जुड़े प्रसंगों की शोभायात्रा में सिर्फ कलाकार ही नहीं थे। कई कलाकार अलग-अलग पेशे से जुड़े थे। प्रयागराज से आए कलाकार जो देडिया नृत्य प्रस्तुत कर रहे थे उनमें शिक्षिका और अधिवक्ता भी थीं। कौशिकी पांडेय ने बताया कि वह शिक्षिका हैं। जब उन्हें जानकारी मिली कि अयोध्या चलना है तो वह उत्साह से फूली नहीं समाईं। बताया कि लोक कलाओं से जुड़े रहना उनकी रुचि है।
बस यही बात उन्हें यहां तक लेकर चली गई। अधिवक्ता दीपशिखा इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं। वह बताती हैं कि दीपोत्सव के कार्यक्रम का हिस्सा बनने की प्रबल इच्छा से ज्यादा यह आस्था का विषय है। इसी बहाने प्रभुराम की सेवा का मौका मिला।
कोविड प्रोटोकाल के पालन के साथ दिखाई दी आस्था
भगवान राम के प्रसंगों से जुड़ी झांकियों के दर्शन के लिए अयोध्यावासियों ने पूरे अनुशासन का परिचय दिया। हर बार की तरह इस बार सड़कों पर भीड़ कम रही। लोगों ने अपने घर की छतों और बालकनी में खड़े होकर झांकियों के दर्शन किए। अपने मंदिरनुमा घर के दरवाजे पर खड़ीं दुर्गावती झांकियों को देखकर भावविभोर हो उठीं। हाथ जोड़कर हर झांकी का दर्शन किया।
उन्होंने बताया कि दीपावली तो सभी जगह मनाई जाती है लेकिन आज अयोध्या का दीपोत्सव पूरी दुनिया देख रही है। दुकानदार मनोज ने बताया कि हर बार जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत पुष्ष वर्षा के साथ किया जाता था। लेकिन इस बार कोविड के चलते स्वागत को सीमित कर दिया गया। हनुमानगढ़ी के पास शोभायात्रा का इंतजार कर रहे साकेत ने बताया कि इस दिन का उन्हें इंतजार था।
अयोध्या की सांस्कृतिक आभा को जीवंत कर रहा दीपोत्सव समारोह
अयोध्या। कोरोना संक्रमण के चलते दीपोत्सव समारोह में प्रत्यक्ष रूप से शामिल न होने की प्रशासन की अपील का असर दिखा। इसके लिए प्रशासन ने बाहरी श्रद्धालुओं के अयोध्या प्रवेश पर प्रतिबंध भी लगाया था। वहीं, अयोध्यावासी इस चौथे दीपोत्सव समारोह के प्रमुख आकर्षण साकेत महाविद्यालय से निकली भव्य शोभायात्रा को देखने का मोह न छोड़ सके, स्थानीय लोगों ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर इस शोभायात्रा का दर्शन किया।
दीपोत्सव समारोह के दौरान साकेत महाविद्यालय से निकली शोभायात्रा को देखने के लिए टेढ़ी बाजार से नयाघाट तक सड़क की दोनों पटरियों पर अयोध्यावासी, साधु संत, महिलाएं, बच्चे कतारबद्ध होकर हाथ जोड़े खड़े रहे। इस दौरान वह समय-समय पर जयश्रीराम का उद्घोष भी करते रहे। समारोह की भव्यता का बखान करते हुए लोगों ने कहा कि इस आयोजन ने अयोध्या की ऐतिहासिक व पौराणिक सभ्यता को जीवंत कर रखा है। हनुमानगढ़ी चौराहे के पास शोभायात्रा का दर्शन करने के लिए खड़े स्थानीय दुकानदार राजू श्रीवास्तव, संजय पांडेय, जोगिंदर शर्मा, बृजेश गुप्ता आदि कहते हैं कि एक बार फिर त्रेतायुग की अयोध्या को जीवंत किया जा रहा है।